अखिलेश के करीबी सांसद पर क्यों चला बुलडोजर, गुनाह बड़ा है!

Global Bharat 02 Aug 2024 04:42: PM 2 Mins
अखिलेश के करीबी सांसद पर क्यों चला बुलडोजर, गुनाह बड़ा है!

संदीप शर्मा

क्या धनंजय सिंह के लिए जौनपुर में नई सियासी बिसात बिछाई जा रही है. जौनपुर से सपा सांसद बाबू सिंह कुशवाहा की संपत्ति पर बुलडोजर चलने को धनंजय सिंह से क्यों जोड़ा जा रहा है, जो ईडी हमेशा सुरक्षाबलों को लेकर छापा मारती है, वो पहली बार बुलडोजर लेकर क्यों गई, लखनऊ के कानपुर रोड पर स्थित प्रॉपर्टी पर पहले जब्ती का बोर्ड लगाती है, उसके बाद वहां किए गए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाती है, ये कार्रवाई इसलिए भी ज्यादा अहम हो जाती है, क्योंकि बाबू सिंह कुशवाहा को दो दिन पहले ही समाजवादी पार्टी ने संसदीय दल का का उपनेता बनाया था. जिसका मतलब है अखिलेश की गैरमौजूदगी में वो सपा का प्रतिनिधित्व करेंगे, पर इस एक्शन से अब अखिलेश भी टेंशन में हैं, क्योंकि साल 2024 के चुनाव में अखिलेश ने ही बाबू सिंह कुशवाहा का राजनीतिक वनवास खत्म किया था.

कौन है बाबू सिंह कुशवाहा 

  • 58 साल के बाबू सिंह कुशवाहा बांदा जिले के पखरौली गांव के किसान परिवार से आते हैं
  • साल 1988 में कांशीराम के संपर्क में आए और 6 महीने में ही इन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल गई
  • 1993 में बांदा जिला अध्यक्ष बने, साल 2003 में बसपा सरकार में पंचायती राज मंत्री बने
  • असली कद साल 2007 में बढ़ा, जब मायावती ने इन्हें कई बड़े विभाग का जिम्मा सौंपा
  • उसी दौरान यूपी में परिवार कल्याण मंत्रालय में घोटाला हुआ, जिसके आरोप बाबू सिंह पर लगे

उसके बाद ये कहानी खुलकर सामने आई कि बाबू सिंह कुशवाहा मायावती के सबसे विश्वस्त नेताओं में से एक थे. ये पार्टी के संस्थापक कांशीराम के करीबी जरूर थे, लेकिन मायावती के आवास पर इनकी ड्यूटी फोन रिसीव करने की थी, वहां से विधायक, सांसद और फिर मंत्री बनने का सफर बाबू सिंह ने जिस अंदाज में तय किया, उसकी तारीफ कई लोग करते हैं, लेकिन उसी बीच इनका नाम कुछ ऐसे कारनामों में आया कि राजनीति जीवन पर संकट मंडराने लगा, हर पार्टी ने किनारा कर लिया, ये वो वक्त था जब बीजेपी सत्ता में आने का ख्वाब देख रही थी.

नितिन गडकरी पार्टी के अध्यक्ष हुआ करते थे, यूपी में सूर्य प्रताप शाही और विनय कटियार की मौजूदगी में बाबू सिंह कुशवाहा बीजेपी में शामिल होते हैं, पर पार्टी के अंदर ही इनकी छवि को लेकर इतने तरह के सवाल खड़े होते हैं कि इन्हें तब के पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को लेटर लिखना पड़ता है. उसमें ये खुद लिखते हैं कि जब तक मैं निर्दोष साबित नहीं हो जाता मुझे पार्टी सदस्यता से निलंबित कर दिया जाए.

उसके बाद साल 2014 में जैसे ही मोदी की सरकार आती है, वो भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई का बिगुल बजाते हैं, बाबू सिंह कुशवाहा जैसे लोग समझ जाते हैं अब बचना मुश्किल है, इसलिए साल 2016 में अपनी खुद की पार्टी बना लेते हैं, नाम रखते हैं जन अधिकार पार्टी, पर असली जिंदगी बदलती है साल 2024 में जब अखिलेश यादव इन्हें जौनपुर से सपा का टिकट दे देते हैं, जहां बीजेपी के कृपाशंकर सिंह को हराकर ये सांसद बन जाते हैं, पर सांसद बनने के तीन महीने के भीतर ही जैसा एक्शन होता है, वो बता देता है कि बाबू सिंह कुशवाहा की बाबूगिरी पर अब तगड़ा एक्शन होने वाला है.

10 सालों में ईडी ने इनकी 250 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त कर दी है. NRHM घोटाले में जिस तरह से इनका नाम सामने आया है. अगर सजा हुई तो सांसदी भी जा सकती है, अगले एक-दो सालों में अगर ऐसा कोई फैसला होता है तो फिर धनंजय सिंह को बड़ा मौका मिल सकता है. वो अपने गढ़ में अपना दबदबा बनाए रखने में कामयाब हो सकते हैं.

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