सीएम योगी के घर बुलाई गई इमरजेंसी मीटिंग, आगे क्या होने वाला है?

Global Bharat 04 Jun 2024 2 Mins 417 Views
सीएम योगी के घर बुलाई गई इमरजेंसी मीटिंग, आगे क्या होने वाला है?

उत्तर प्रदेश में बीजेपी 80 में 80 का नारा दे रही थी, लेकिन दो लड़कों ने ऐसा खेल किया कि बीजेपी का ये सपना टूट गया. जिसे देखते ही योगी के चेहरे की भाव-भंगिमा एक दम से बदल गई. उन्होंने तुरंत सीएम आवास पर एक मीटिंग बुलाई. मीटिंग में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, यूपी बीजेपी चीफ भूपेन्द्र चौधरी और यूपी प्रभारी धर्मपाल ने अपनी-अपनी बात रखी.

ख़बर है कि योगी आदित्यनाथ हर नेता से यही सवाल पूछते रहे कि आखिर 80 में 80 का टारगेट जब सेट था, पिछले चुनाव में बीजेपी ने जब 67 सीटें अकेले जीती थीं, तो फिर इस बार खेल कैसे बिगड़ गया, अगर किसी नेता के पास कोई इनपुट था तो वो हाईकमान तक क्यों नहीं पहुंचा. जिस हिसाब के चुनावी नतीजे यूपी में आए हैं और सपा-कांग्रेस को आधी से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं. उस हिसाब से यूपी बीजेपी की रणनीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

एक्सपर्ट बताते हैं कि यूपी में बीजेपी इन चार कारणों से आगे नहीं बढ़ पाई

पहली वजह- राजपूतों की नाराजगी- उत्तर प्रदेश में क्षत्रियों की नाराजगी की भी बीजेपी को कीमत चुकानी पड़ गई. पहले गुजरात में परषोत्तम रुपाला का क्षत्रियों पर कमेंट मुद्दा बना. जिसकी आंच यूपी तक महसूस की जा रही थी. इस बीच गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह का टिकट कटना भी मुद्दा बन गया. इस बीच चुपचाप तरीके से एक अफवाह यह भी फैलाई गई कि अगर बीजेपी को 400 सीटें मिलती हैं तो उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को बीजेपी हटा देगी. प्रतापगढ़ में राजा भैया राज्यसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के साथ दिखे थे. पर बाद में उनकी नाराजगी से भी पार्टी को नुकसान पहुंचा.

दूसरी वजह- युवा पीढ़ी और पेपर लीक- ऐसा कहा जा रहा है कि पेपर लीक और यूपी पुलिस एग्जाम की तारीख न आने से परेशान युवाओं ने सत्ता के खिलाफ वोटिंग की और विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया भी, जिसका फायदा उसे मिला. अखिलेश-राहुल लगातार महंगाई, बेरोजगारी और युवाओं का मुद्दा उठाते रहे, जिसका असर चुनाव में दिखा.

तीसरी वजह-अखिलेश का सूझबूझ के साथ टिकट बांटना- चुनावों के दौरान अखिलेश यादव की इस बात के लिए बहुत आलोचना हुई कि वो बार-बार अपने कैंडिडेट बदल रहे हैं. पर इस बात की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने जो कैंडिडेट खड़े किए वो स्थानीय गणित के हिसाब से बेहतर थे. यही कारण है धरातल पर वो बीजेपी कैंडिडेट को जबरदस्त टक्कर देते न सिर्फ दिखे, बल्कि अयोध्या यानि फैजाबाद जैसी सीट पर कड़ा मुकाबला दिखा. 

चौथी वजह- मायावती के कैंडिडेट ने बदला गेम- आम तौर पर बीएसपी को विपक्ष भाजपा की बी टीम कहकर टार्गेट करता रहा है पर कहानी कुछ और ही चल रही थी. पश्चिम से पूरब तक मायावती ने ऐसे कैंडिडेट खड़े किए जो एनडीए कैंडिडेट्स को ही नुकसान पहुंचा रहे थे. पश्चिमी यूपी में मेरठ में देवव्रत त्यागी, मुजफ्फरनगर से दारा सिंह प्रजापति, खीरी सीट से बीएसपी का पंजाबी प्रत्याशी आदि बीजेपी को सीधे नुकसान पहुंचा रहे थे.

इसी तरह पूर्वी यूपी में घोसी में बीएसपी ने जो कैंडिडेट दिया वह सीधा इशारा था कि पार्टी ने एनडीए का काम खराब करने का ठेका ले लिया है. इसके अलावा कुछ अपने ही नेताओं ने भी लगता है ठीक से मेहनत नहीं की, वरना ऐसा हाल न होता. यूपी में बीजेपी की इस हालत का आपको कौन जिम्मेदार लगता है, कमेंट कर बता सकते हैं.