Bhiwandi-Nizampur Municipal Corporation Mayor: महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर नगर निगम में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है. यहां हाल ही में हुए मेयर चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब भाजपा के ही एक बागी नेता नारायण चौधरी ने कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के साथ गठबंधन कर महापौर पद पर कब्जा जमा लिया.
जनवरी में संपन्न हुए नगर निगम चुनाव में 90 सीटों वाली इस संस्था में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी (30 सीटें), जबकि भाजपा को 22, शिवसेना को 12 और अन्य छोटे दलों को बाकी सीटें मिली थीं. मेयर चुनने के लिए कम से कम 46 वोटों की जरूरत थी.
शुक्रवार को हुए मतदान में नारायण चौधरी को 48 वोट मिले और वे आसानी से विजयी घोषित हो गए. भाजपा की आधिकारिक उम्मीदवार स्नेहा पाटिल को महज 16 वोट ही मिल सके, जबकि कोणार्क विकास अघाड़ी के विलास पाटिल (शिंदे गुट की शिवसेना के समर्थन से) 25 वोट पर रह गए. उप-मेयर पद पर कांग्रेस के मोमिन तारिक बारी 43 वोट लेकर चुने गए.
यह सब तब हुआ जब भाजपा ने नारायण चौधरी को पहले मेयर उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने उन्हें हटाकर स्नेहा पाटिल को चुना. इससे नाराज चौधरी ने कुछ अन्य भाजपा पार्षदों (करीब 6-9) के साथ बगावत कर दी और 'भिवंडी सेक्युलर फ्रंट' के तहत कांग्रेस-एनसीपी (एसपी)-समाजवादी पार्टी आदि के साथ जुड़ गए.
भाजपा नेतृत्व ने इसे पार्टी नीति का उल्लंघन बताते हुए चौधरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है. वहीं कांग्रेस और सहयोगी दलों ने इसे 'सेक्युलर' ताकतों की जीत करार दिया और कहा कि उन्होंने भाजपा या शिंदे शिवसेना के साथ कोई समझौता नहीं किया.
नारायण चौधरी ने जीत के बाद कहा कि वे अब सिर्फ शहर के विकास पर फोकस करेंगे. बता दें कि राजनीतिक सफर में उनका बैकग्राउंड काफी दिलचस्प रहा है. वे पहले कांग्रेस, फिर सपा, शिवसेना और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे. यह घटना महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में बड़ा ट्विस्ट साबित हुई है, जहां गठबंधन और बगावत ने अंतिम क्षण में समीकरण बदल दिए.