लख़नऊ : पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीति में उतरने के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने उन पर तंज कसा है. राजभर ने कहा कि दिव्या मित्तल ने शायद पैसा-वइसा कमा लिया होगा, अब राजनीति में आ रही हैं और सोच रही होंगी कि जल्दी विधायक बन जाएंगी. इसी दौरान उन्होंने कहा कि आईएएस बनना आसान है, लेकिन एमएलए बनना बहुत कठिन है, क्योंकि विधायक बनने के लिए जनता के बीच लगातार काम करना पड़ता है.
ओपी राजभर के इस बयान के बाद उनके अपने राजनीतिक सफर पर भी नजर जाती है. आखिर राजभर खुद कितनी कोशिशों के बाद विधायक बने
ओपी राजभर ने बताया कि 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था. उन्होंने जहूराबाद विधानसभा सीट से अपनी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरकर किस्मत आजमाई, लेकिन समाजवादी पार्टी की सैयदा शादाब फातिमा से चुनाव हार गए.
इसके बाद राजभर ने अपनी रणनीति बदली और 2016 में बीजेपी से गठबंधन किया. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी-सुभासपा गठबंधन के तहत वह फिर जहूराबाद से मैदान में उतरे. इस बार उन्होंने 86,583 वोट हासिल करते हुए बसपा के कालीचरण राजभर को 18,081 वोटों से हराया और पहली बार विधानसभा पहुंचे. चुनाव आयोग के आंकड़े भी 2017 में उनकी जीत की पुष्टि करते हैं.
यही वजह है कि दिव्या मित्तल पर उनके बयान के साथ अब उनका अपना चुनावी सफर भी चर्चा में है. IAS से राजनीति में आने का फैसला अलग विषय है, लेकिन चुनावी मैदान में उतरकर जनता का वोट हासिल करना एक अलग प्रक्रिया है.