80th Independence Day: रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स पर पीएम मोदी का बड़ा संदेश; आत्मनिर्भरता से टूटेगी चीन की निर्भरता

Rahul Jadaun 15 Aug 2026 10:32 AM 1 Mins
80th Independence Day: रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स पर पीएम मोदी का बड़ा संदेश; आत्मनिर्भरता से टूटेगी चीन की निर्भरता

नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य की तकनीक और रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से 'रेयर अर्थ मिनरल्स' (Rare Earth Minerals) और 'क्रिटिकल मिनरल्स' को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक भू-राजनीति में संसाधनों के हथियार बनने की चुनौती का जिक्र करते हुए देश को इन महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता रेखांकित की।

संसाधनों के वेपनाइजेशन के दौर में सुरक्षा कवच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में हर देश अपने संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ईंधन (पेट्रोल-डीजल), फर्टिलाइजर, दवाओं से लेकर रणनीतिक भू-भाग तक को आज वेपनाइज किया जा रहा है। ऐसे दौर में विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहना किसी भी राष्ट्र की आर्थिक और सामरिक संप्रभुता के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

क्रिटिकल और रेयर अर्थ मिनरल्स की अहमियत

आधुनिक दुनिया के भविष्य को तय करने में रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर चिप्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सोलर पैनल्स, पवन चक्कियों और एडवांस्ड डिफेंस इक्विपमेंट्स का निर्माण पूरी तरह इन्हीं दुर्लभ खनिजों पर टिका है। वैश्विक स्तर पर इन खनिजों की प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन पर 90 फीसदी से ज्यादा नियंत्रण चीन का रहा है। भारत इस निर्भरता को खत्म करने के लिए घरेलू स्तर पर तेजी से काम कर रहा है।

नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और अंतरराष्ट्रीय डील्स

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत ने 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन' और 'क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर' जैसी पहलों के जरिए घरेलू स्तर पर खोज (Exploration) और प्रोसेसिंग को मिशन मोड में शुरू किया है। इसके साथ ही, भारत रणनीतिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चीन से इतर ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र देशों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते और साझेदारियां कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही विदेशी बाजारों से चीजें शुरुआत में सस्ती या आसानी से मिल जाएं, लेकिन उससे आंतरिक मजबूती नहीं आती। अपनी रणनीतिक संपदा और ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए भारत को अपनी क्षमताओं का विस्तार खुद करना होगा।

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