नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपने विदेश दौरे के तहत अमेरिका के बोस्टन पहुंचे हैं. उनका यह दौरा राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का हिस्सा बना हुआ है. राहुल गांधी पहले भी विदेश दौरों के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों और समुदायों के साथ बातचीत कर चुके हैं. इस बार भी उनके दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है. कांग्रेस समर्थक इसे उनकी वैश्विक स्तर पर सक्रियता का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा करार दे रहे हैं.
बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट बयानों से झाड़ा पल्ला
इस बीच, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश पर पार्टी के दो सांसदों- निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा के बयानों से दूरी बना ली है. नड्डा ने साफ किया कि ये बयान सांसदों के निजी विचार हैं और बीजेपी का इनसे कोई लेना-देना नहीं है. निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों और मुख्य न्यायाधीश पर टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद विपक्ष ने बीजेपी पर न्यायपालिका को प्रभावित करने का आरोप लगाया.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा के बयानों ने सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तीखी बहस छेड़ दी है. कई लोग इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा मान रहे हैं. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार की ओर से न्यायपालिका को दबाने की कोशिश है. वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करती है.
राहुल गांधी के दौरे पर सियासी बयानबाजी
राहुल गांधी के अमेरिका दौरे को लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस में जुबानी जंग तेज हो गई है. बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि राहुल गांधी देश की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए विदेश दौरे कर रहे हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे बीजेपी की बौखलाहट करार दिया और कहा कि राहुल गांधी वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष रख रहे हैं. इस सियासी तकरार ने खबर को और सुर्खियों में ला दिया है.
न्यायपालिका और राजनीति पर बढ़ता तनाव
सुप्रीम कोर्ट पर सांसदों के बयानों और राहुल गांधी के दौरे ने एक बार फिर राजनीति और न्यायपालिका के बीच तनाव को उजागर किया है. जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान और घटनाक्रम संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठा सकते हैं. फिलहाल, यह मुद्दा देश की सियासत में गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और चर्चा होने की संभावना है.