Kaushambi News: कौशांबी का वो ग्राम प्रधान कौन है, जिस पर एक ब्राह्मण परिवार ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, दो तरीके की थ्योरी मीडिया में चल रही है, पहली थ्योरी के मुताबिक ये तस्वीरें उस पिता के हैं, जो कौशांबी के सैनी थाने में पहुंचते हैं, तो कदम लड़खड़ाने लगते हैं, पूछने पर अपना नाम रामबाबू तिवारी, पता लोहदा गांव, जिला कौशांबी, बताते हैं, जिनके बेटे को पुलिस ने एक नाबालिग से गलत हरकत के आरोप में जेल में बंद किया था, वो कह रहे थे मेरा बेटा निर्दोष है, उसे ग्राम प्रधान ने फंसाया है, पर और कुछ कह पाते उससे पहले ही तबियत बिगड़ जाती है, पुलिस इन्हें उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिराथु ले जाती है, जहां उनकी मौत हो जाती है.
जांच में पता चलता है सुनवाई न होने से परेशान रामबाबू तिवारी ज़हर खाकर थाने पहुंचे थे. दैनिक भास्कर अपनी रिपोर्ट में ये दावा करता है. शर्ट हटाने पर उनके पेट पर कुछ आरोपियों के नाम भी लिखे नजर आते हैं, जिसमें ग्राम प्रधान भूपनारायण पाल और उसके साथियों का नाम था. पीड़ित परिवार का आरोप है कि ग्राम प्रधान ने फर्जी तरीके से उनके लड़के को फंसाया है. जबकि दूसरी थ्योरी पुलिस की है, जिसके मुताबिक सीओ सिराथू अवधेश विश्वकर्मा का दावा है
“सैनी थाने की पुलिस को एक व्यक्ति के जहर खाने की सूचना मिली थी. पुलिस मौके पर पहुंची, पीड़ित को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां उसकी मौत हो गई, पूरे मामले की जांच की जा रही है.”
लेकिन इसी बीच ख़बर ये भी सामने आती है कि परिजनों ने जब इंसाफ की मांग को लेकर हंगामा किया तो पुलिस ने उनकी नहीं सुनी, सवर्ण आर्मी ने जब सड़क पर उतरकर विरोध जताना शुरू किया, तो सवर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष समेत 30 लोगों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया, ये दावा सवर्ण आर्मी बाराबंकी के ट्विटर हैंडल से किया जाता है. जिसमें एक अखबार की कटिंग के साथ लिखा कौशांबी सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं का सिर्फ इतना अपराध है कि उन्होंने एक गरीब ब्राह्मण को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाई। सवर्ण आर्मी ने इसे लेकर 4 बड़ी मांगे रखी है.
कई लोग इस घटना के बाद यूपी में ब्राह्मणों के खिलाफ हो रहे अन्याय का मुद्दा भी उठा रहे हैं, जिनका दावा है योगीराज में ब्राह्मणों को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है. हालांकि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस मामले को लेकर बड़ा आदेश दिया है, उन्होंने लिखा है
“कौशांबी में स्वर्गीय रामबाबू तिवारी प्रकरण में उनके परिजनों को न्याय मिले एवं दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराने हेतु प्रमुख सचिव गृह को निर्देशित किया.”
पर सवाल है इंसाफ मिलेगा कब. जिस प्रधान पर बेटे को फर्जी तरीके से जेल भेजवाने के आरोप लग रहे हैं, उसकी बात पुलिस ने कैसे मान ली, क्या इसमें कुछ पुलिसवालों की भी संलिप्तता है, कई बार मामले की तह तक जाने के बाद नए खुलासे होते हैं. तो इस मामले की तह तक कौन जाएगा, क्या इसकी जांच के लिए भी कोई कमेटी बनेगी. रामबाबू तिवारी की पत्नी चंदा देवी के नाम से लिखा लेटर जो सोशल मीडिया पर वायरल है, उसमें SIT जांच की मांग की गई है.
मुख्यमंत्री राहत कोष से परिवार को आर्थिक मदद देने और निर्दोष बेटे को जेल से रिहा करने की अपील की गई है. अब कोई दोषी है या निर्दोष ये तय करना अदालत का काम है, पर पुलिस अगर इस तरीके से किसी के प्रभाव में काम करेगी, जैसे आरोप लग रहे हैं तो फिर आम जनता की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा. ये बड़ा सवाल है. क्या जिस यूपी में चंद्रशेखर दलितों की सियासत कर रहे हैं, मायावती और आकाश आनंद दलित वोटबैंक साधने के चक्कर में जुटे हैं, अखिलेश को यादव और मुस्लिमों से फुर्सत नहीं है, वहां सवर्ण आर्मी का क्या भविष्य होगा, क्या ये रामबाबू के परिवार को इंसाफ दिला पाएगा. ये भी बड़ा सवाल है.