नई दिल्ली : गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला के एक बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है. वाघेला ने जातियों का नाम लेते हुए कहा कि अगर पटेल, बनिया और ब्राह्मण समाज के लोग कूड़ा उठाने का काम करें तो वह उन्हें 50 हजार रुपये देने को तैयार हैं. उनके इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक प्रतिक्रिया तेज हो गई है.
वाघेला के बयान में खास तौर पर पटेल, बनिया और ब्राह्मण समुदाय का जिक्र होने के कारण इसे जातिगत टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है. उनके बयान को लेकर समर्थक और विरोधी अपने-अपने तरीके से इसकी व्याख्या कर रहे हैं. विरोध करने वालों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले किसी वरिष्ठ नेता को जातियों को लेकर इस तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए.
शंकर सिंह वाघेला गुजरात की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. वह गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. ऐसे में उनके बयान को लेकर विवाद बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है.
हालांकि, बयान किस संदर्भ में दिया गया और वाघेला का पूरा आशय क्या था, यह स्पष्ट होना भी महत्वपूर्ण है. किसी भी बयान के पूरे संदर्भ के आधार पर ही उसके राजनीतिक और सामाजिक मायने तय किए जा सकते हैं.
फिलहाल उनके इस कथित बयान को लेकर सियासत गरमा गई है. अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है. गुजरात की राजनीति में जातीय समीकरण पहले से ही बेहद अहम रहे हैं, ऐसे में पटेल, बनिया और ब्राह्मण जैसे प्रभावशाली समुदायों का नाम लेकर दिया गया बयान राजनीतिक बहस को और हवा दे सकता है.