वृंदावन: रविवार को विश्व विख्यात बांके बिहारी मंदिर में उस वक्त हंगामा मच गया जब बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दर्शन के लिए पहुंचे. उनकी पदयात्रा का समापन यहीं होना था, इसलिए पहले से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु जमा थे. जैसे ही शास्त्री वीआईपी गेट से अंदर दाखिल हुए, भीड़ एकदम बेकाबू हो गई.
गर्भगृह के पास दबाव इतना बढ़ा कि मंदिर की सारी व्यवस्था चौपट हो गई. भीड़ को काबू करने के चक्कर में पुलिस और मंदिर के सेवादारों के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई. कई सेवादारों के कपड़े फट गए, कुछ के साथ मारपीट भी हुई. मौके पर मौजूद ASP अनुज कुमार चौधरी को खुद एक सेवादार को खींचकर बाहर निकालना पड़ा.
नाराज सेवादारों ने पुलिस पर मनमानी और अभद्रता का आरोप लगाया. उनका कहना था कि वे सिर्फ ठाकुर जी की मर्यादा और परंपरा बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें ही निशाना बनाया. एक सेवादार ने फटा कुर्ता दिखाते हुए कहा कि हम सदियों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं, लेकिन आज वीआईपी कल्चर के नाम पर हमारी इज्जत को तार-तार कर दिया गया. पुलिस ने हमें पीटा, धक्के मारे, कपड़े फाड़ दिए.
पुलिस का पक्ष है कि शास्त्री की सुरक्षा और भक्तों की जान बचाने के लिए सख्ती करनी पड़ी. भीड़ इतनी थी कि कुचलने की नौबत आ गई थी, इसलिए मजबूरी में बल प्रयोग हुआ. लेकिन सेवादारों ने इसे परंपरा पर हमला करार दिया है.
घटना के बाद मंदिर परिसर में काफी देर तक तनाव रहा. वीआईपी दर्शन की व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन की कमी और सेवादारों के साथ समन्वय न होने पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोग और गोस्वामी समाज ने प्रशासन से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ठाकुर जी के दरबार में इस तरह की बदइंतजामी दोबारा न हो.