लखनऊ: मोहनलालगंज इलाके में मंगलवार शाम गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान सई नदी में तीन युवक डूब गए. चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर पुलिस मौजूद थी, लेकिन बचाव की बजाय वह भीड़ के साथ डूबते युवकों का वीडियो बनाती रही. सिसेंडी कस्बे के कोरियानी मोहल्ले से सैकड़ों लोग उन्नाव बॉर्डर पर जबरैला पुल के पास सई नदी में मूर्ति विसर्जन के लिए पहुंचे थे. आठ-दस लोग मूर्ति लेकर नदी में उतरे.
विसर्जन के बाद लौटते समय तेज बहाव में प्रमोद (22), धीरज (25) और हरि प्रसाद (30) डूबने लगे. एक युवक को लोगों ने बचा लिया, लेकिन तीनों को नहीं बचाया जा सका. भीड़ में शामिल लोग और पुलिस कर्मी वीडियो रिकॉर्ड करते रहे. पुलिस वाले अधिकारियों को फोन कर जानकारी देते रहे, लेकिन खुद बचाव में आगे नहीं बढ़े. सूचना मिलने के बावजूद एसडीआरएफ टीम देर से पहुंची. इससे ग्रामीण नाराज हो गए और पुलिस से नोकझोंक हो गई.
अपर पुलिस उपायुक्त दक्षिणी रल्लापल्ली बसंथ कुमार और एडीएम एफआर राकेश कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराया. एसडीआरएफ के गोताखोर रात भर खोजबीन करते रहे, लेकिन तीनों युवकों का अब तक कोई पता नहीं चला. ग्रामीणों ने बताया कि सिसेंडी और आसपास के गांवों से लोग नियमित रूप से यहां विसर्जन के लिए आते हैं. मंगलवार को करीब डेढ़ हजार लोगों की भीड़ जुटी थी, लेकिन सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कुछ पुलिस कर्मी मौजूद थे. न बैरिकेडिंग थी, न नाविक या तैराक तैनात थे.
प्रमोद फर्नीचर का काम करते थे. उनके परिवार में मां रानी, पिता हरिशंकर और तीन भाई हैं. धीरज घरों में पेंटिंग का काम करते थे. उनकी पत्नी अनीता, मां दीपा और पिता रामनरेश नदी किनारे बैठे रो रहे थे. हरि प्रसाद की पत्नी श्यामावती अपने 12 साल के बेटे निहाल और आठ साल की बेटी निहारिका को गोद में चिपकाए पिता के वापस आने का इंतजार कर रही थीं.
हादसा करीब शाम पांच बजे हुआ. पुलिस अधिकारी तो पहुंच गए, लेकिन गोताखोर टीम करीब दो घंटे बाद सात बजे नदी में उतरी. पुल पर जनरेटर से रोशनी का इंतजाम कर खोजबीन जारी रखी गई. यह घटना विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की भारी लापरवाही को उजागर करती है. सोशल मीडिया पर युवकों के डूबने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.