पाकिस्तान का आयरन एस्कॉर्ट: इस्लामाबाद में शांति वार्ता को लेकर क्या है तैयारी?

Abhishek Chaturvedi 10 Apr 2026 08:20: PM 3 Mins
पाकिस्तान का आयरन एस्कॉर्ट: इस्लामाबाद में शांति वार्ता को लेकर क्या है तैयारी?

ये तस्वीरें हैं इस्लामाबाद की, जहां सुरक्षा व्यवस्था ऐसी कड़ी कर दी गई है कि परिंदा भी पर न मार पाए, दो दिनों की छुट्टी पूरे शहर में घोषित हुई, मुनीर की सेना ने विदेशी नेताओं की सुरक्षा का जिम्मा संभाला हुआ है, क्योंकि शहबाज शरीफ पीस मेकर बनना चाहते हैं, पर इस मामले में दो बड़ा पेंच फंस गया है.

  • पहला- ईरान की सीमाओं में इजरायल के हमले का खतरा अब भी बना हुआ है
  • दूसरा- लेबनान में इजरायल अब तक हमले कर रहा है, जो शर्तों का उल्लंघन है

जिसे लेकर पाकिस्तानी अखबार डॉन ने इजरायल के खिलाफ खूब अनाप-शनाप लिखा है, उसने ये तक लिख दिया कि नेतन्याहू को इसका जिम्मेदार ठहरा रहा है, उसने लिखा, ''इजरायल इस बात से बहुत नाराज है कि ईरान को तबाह करने की उसकी और अमेरिका की मिली-जुली कोशिश नाकाम रही है; इजरायली मीडिया में इस बात को लेकर सरकार की खूब आलोचना हो रही है कि वह इस क्रूर युद्ध में अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही.''

यही वजह है कि पाकिस्तान ने अपने फाइटर जेट ईरानी नेताओं की सुरक्षा के लिए मिडिल ईस्ट में भेज दिए हैं, ऐसी ख़बरें सामने आई है, इस पूरे घेरे को आयरन एस्कॉर्ट कहा जा रहा है, ताकि ईरानी डेलिगेशन जो बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे, उसकी सुरक्षा में कोई खतरा पैदा न हो, पर सवाल ये भी उठ रहा है कि अगर इजरायल ने कोई हमला कर दिया तो क्या इजरायल के खिलाफ पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई करने की हिम्मत रखता है, और अफगानिस्तान के अलावा नए मोर्चे पर जंग लड़ पाएगा, क्योंकि इजरायल के खिलाफ जाने का मतलब होगा, अमेरिका से भी उसे लोहा लेना होगा, जो पाकिस्तान के वश की बात नहीं है, इसीलिए जानकार इसे पाकिस्तान की पीस मीटिंग का एक खोखला एजेंडा बता रहे हैं.

जहां जहाजों को भेजकर वो ये बताना चाहता है कि मैं शांति वार्ता करवाने को तैयार हूं, इसके लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं, ताकि दुनिया में शांति आए. लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि आतंकियों को पालकर दुनियाभर में अशांति फैलाने वाला पाकिस्तान आखिर ऐसा कर क्यों रहा है, क्या उसके ऐसा करने के पीछे कोई बड़ी मंशा छिपी है. पहली मंशा तो अमेरिका को खुश करना है ही, लेकिन दूसरी मंशा उसे दुनिया के सामने अपनी छवि बदलनी है, लेकिन इस डील पर अब तक शंका के बादल मंडरा रहे हैं, एक तरफ लड़ाकू विमान भेजने और इस्लामाबाद में सुरक्षा टाइट वाली तैयारी है, तो दूसरी तरफ इस्लामाबाद में कई कमरों में भी बड़ी तैयारियां चल रही है.

कैसे होगी ईरान-अमेरिका की महामुलाकात

एक कमरे में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस होंगे, जबकि दूसरे कमरे में ईरान की ओर से भेजा गया प्रतिनिधिमंडल होगा. दोनों के बीच मैसेंजर का काम पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार करेंगे. इसके अलावा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी दोनों से अलग-अलग मुलाकात करेंगे.

लेकिन ये सब तभी हो पाएगा जब इजरायल उधर हमले रोकेगा, क्योंकि ईरान की मीडिया ये दावा कर रही है कि लेबनान में हमले जारी रहे तो कोई सीजफायर नहीं होगा, और ईरान जंग लड़ने में पूरी तरह सक्षम है. तो सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या इजरायल के इस फैसले से ये युद्ध रुकने की बजाय महायुद्ध में तब्दील हो जाएगा, और ट्रंप जो न चाहते हुए भी इस जंग से बाहर निकलना चाहते हैं, उन्हें जबरन इस बार और बड़े हमले करने होंगे. क्योंकि इजरायल अगर जंग में रहा, तो फिर अमेरिका उससे पूरी तरह नहीं निकल पाएगा.

विदेश मामलों के बड़े-बड़े जानकार इस बात की आशंका जता रहे हैं कि पाकिस्तान की ये मध्यस्थता पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगी, क्योंकि इजरायल ने भी साफ कह दिया है कि हमें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है तो जब भरोसा ही नहीं है तो शांति समझौता होगा कैसे...ये बड़ा सवाल है. नेतन्याहू और ट्रंप इस बार ऐसे फंसे हैं कि ब्रिटेन भी अब तेल की कीमतें बढ़ने का गुस्सा इन पर निकाल रहा है, दुनियाभर के जहाज जो होर्मुज में फंसे हैं, वो तेल संकट को और बढ़ा सकते हैं. भारत के कई जहाजों के भी होर्मुज में फंसे होने की ख़बर है, जो भारत नहीं पहुंचे तो समस्या बड़ी हो सकती है.

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