नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट में बीते कुछ दिनों से क्या चल रहा है? जस्टिस समीर जैन कौन हैं, जिनके पास अब्बास से लेकर आजम तक और हमास समर्थक से लेकर इरफान सोलंकी तक के मुकदमे गए, और इन्होंने हर केस में जमानत याचिका मंजूर की. क्या इनके सामने योगी की पुलिस की ओर से वकीलों ने ठीक दलील नहीं दी. बेल मिलना और न मिलना अदालती प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन ये सारे फैसले समाजवादी पार्टी के लिए संजीवनी की तरह हैं, जो आजम बीते 23 महीने से जेल में बंद थी, उनकी जमानत याचिका जस्टिस समीर जैन के सिंगल बेंच में मंजूर होती है.
उससे पहले माफिया मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को भी यहां से राहत मिलती है. जब अब्बास की विधायकी चली गई, और वो हाईकोर्ट गए तो वहां जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच ने उन्हें राहत दी और विधायकी बहाल हो गई. अब कानपुर के सीसामऊ से पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को इन्होंने जमानत दी है. हर केस की स्थिति अलग होती है, जज साहब सबूतों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाते हैं.
इरफान सोलंकी के केस में 2 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. 25 सितंबर को इरफान सोलंकी, उनके भाई रिजवान सोलंकी और दोस्त इजरायल आटेवाला को जमानत मिल जाती है. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल जमानत का विरोध करते हैं. इरफान पर गैंगस्टर एक्ट के तहत केस था, आरोप था ये आर्थिक लाभ के लिए आम जनता को डरा रहा था.
24 महीने से इरफान सोलंकी महाराजगंज जेल में बंद है, जबकि बाकी के आरोपी कानपुर जेल में हैं. इस जमानत के बाद इरफान की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है. बशर्तें कि आजम की तरह कोई नई धारा न जोड़ी जाए और जमानत में देरी न हो. हैरान करने वाली बात ये भी है कि जिन वकील साहब ने आजम के केस में दलील रखी थी, वही इमरान उल्लाह जो पूर्व अपर महाधिवक्ता यूपी के रहे हैं, उन्होंने ही इरफान सोलंकी के केस में भी पैरवी की, ये अखिलेश यादव के बेहद खास हैं. तो क्या अखिलेश ने अपने नेताओं को जेल से छुड़ाने के लिए वकीलों की फौज उतार दी है. क्या पुलिस ने इनके जिन नेताओं को कुछ सालों पहले जेल भेजा था, उन मुकदमों को फर्जी साबित करने में अखिलेश के वकील लगे हैं, और अपनी दलीलों से नेताओं को छुड़ाने में लगे हैं. जिन जज साहब ने इन तीनों नेताओं को राहत दी है. उनके बारे में जब हमने जानकारी जुटाई तो पता चला.
कौन हैं जस्टिस समीर जैन
इन्होंने कई बड़े फैसले दिए, लेकिन चर्चा अब इन तीन नेताओं की हो रही है, उससे पहले हमास का समर्थन करने वाला पोस्ट करने पर जब यूपी पुलिस ने गौस मोहम्मद को गिरफ्तार किया था, और वो करीब 10 महीने तक जेल में रहा, फिर उसके वकील ने दलील दी कि इस पर लगे आरोप झूठे हैं तब सबूतों को ध्यान में रखते हुए जस्टिस समीर जैन ने उसे सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया था. हालांकि यहां एक बात स्पष्ट होना बेहद जरूरी है कि ये सभी आरोपी जमानत पर छूटे हैं, लंबे वक्त तक जेल में रहने के बाद बाहर आए और आने वाले हैं, इनके खिलाफ लगे आरोपों पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.