'गुप्त कमरे, स्विमिंग पूल, सखी रखती है ख्याल...' अविमुक्तेश्वरानंद के मठ में रहीं लेखिका का खुलासा

Amanat Ansari 26 Feb 2026 05:52: PM 2 Mins
'गुप्त कमरे, स्विमिंग पूल, सखी रखती है ख्याल...' अविमुक्तेश्वरानंद के मठ में रहीं लेखिका का खुलासा

Writer Bhumika Dwivedi: लेखिका भूमिका द्विवेदी ने हाल ही में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के वाराणसी स्थित विद्या मठ (श्री विद्या मठ) के बारे में कई गंभीर और चौंकाने वाले दावे किए हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में वे वहां लगभग दो महीने रुकी थीं. उनका मूल उद्देश्य काशी और प्रयाग क्षेत्र पर शोध करना और किताब लिखना था, जिसके लिए पूर्व शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें प्रोत्साहन दिया था. लेकिन मठ में जो अनुभव हुआ, उसने उनकी सोच बदल दी.

उन्होंने कहा कि वहां पारंपरिक आश्रमों वाली सादगी और अनुशासन की जगह लग्जरी का बोलबाला दिखा. कमरों में एयर कंडीशनर, एलईडी टीवी, महंगे कालीन और शानदार सज्जा थी, जिससे हॉल देखकर आंखें चौंधिया जाती थीं. भूमिका के अनुसार, मठ का अधिकांश नियंत्रण एक महिला के हाथ में है, जिसे लोग स्वामी जी की 'सखी' कहते हैं.

यह महिला मुस्कुराते हुए खुद को ऐसा ही बताती थी और वहां वह सर्वेसर्वा की तरह व्यवहार करती थी. मठ के कुछ हिस्से और कमरे पूरी तरह गुप्त और रहस्यमयी हैं. इन्हें 'दीदी लोगों का क्षेत्र' या 'सखी का क्षेत्र' कहा जाता है. वहां लिफ्ट से जाना पड़ता है और आम लोगों की एंट्री सख्ती से मना है. उन्होंने एक सीक्रेट दरवाजे का भी जिक्र किया, जिसकी निगरानी सीसीटीवी कैमरों से होती है और इसका पूरा एक्सेस उसी 'सखी' के पास रहता है.

मठ परिसर में स्विमिंग पूल जैसी सुविधा होने का भी दावा किया गया, लेकिन छोटे बच्चे या बटुक वहां नहीं जाते. भूमिका ने छोटे बटुकों (जो ज्यादातर गरीब परिवारों से आते हैं) के साथ होने वाले व्यवहार पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उनसे भारी काम करवाया जाता है और कभी-कभी उनके सामान तक चोरी हो जाते हैं. एक 8 साल के सुंदर बच्चे ने उनके साथ फोटो खिंचवाने से मना कर दिया था, क्योंकि स्वामी श्री ने ऐसा आदेश दिया था कि किसी बाहरी के साथ फोटो न खींचें.

पारंपरिक मठों में सुबह 4 बजे उठना, कठोर नियम और धार्मिक दिनचर्या होती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं दिखा. लोग अपनी मर्जी से उठते थे और कोई सख्त अनुशासन नहीं था. एक मैनेजर (मिश्रा) ने कथित तौर पर उनसे कहा था कि "हर पुरुष की अपनी जरूरत होती है, वह विश्राम के लिए यहां आते हैं" और उसी महिला को स्वामी जी की सखी बताया था.

उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि स्वरूपानंद सरस्वती के समय उनका कमरा सबके लिए खुला था, जहां सिर्फ किताबें और ग्रंथ मिलते थे. लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद के दौर में सब कुछ छिपा हुआ और रहस्यपूर्ण लगता है. उन्होंने स्वरूपानंद से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन पता चला कि वे बीमार हैं और बेंगलुरु में इलाज करा रहे थे.

ये सभी दावे भूमिका द्विवेदी ने हाल के दिनों में विभिन्न मीडिया माध्यमों से साझा किए हैं, खासकर जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले सामने आए हैं.

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