नई दिल्ली: केरल के नाम को ‘केरलम’ करने की केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद, दिल्ली से भाजपा सांसद ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजधानी का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने की मांग की है. उनका तर्क है कि इससे शहर की प्राचीन सभ्यतागत पहचान बहाल होगी और आधुनिक भारत को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से फिर से जोड़ा जा सकेगा.
चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने अपने पत्र में कहा कि इंद्रप्रस्थ नाम जो महाभारत में वर्णित प्राचीन शहर से जुड़ा है राजधानी की सबसे पुरानी सभ्यतागत उत्पत्ति को दर्शाता है. जबकि ‘दिल्ली’ नाम बाद के ऐतिहासिक दौर को प्रतिबिंबित करता है. इस प्राचीन नाम को बहाल करने से यह प्रतीक बनेगा कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र की राजधानी मानवता की सबसे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं में से एक पर टिकी हुई है.
उन्होंने लिखा, ''दिल्ली को इंद्रप्रस्थ नाम देना भारत की राजधानी की सभ्यतागत पहचान को बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा. इससे राष्ट्रीय गौरव मजबूत होगा, दुनिया के सामने भारत की प्राचीन विरासत को उजागर करेगा और आधुनिक भारत को उसके शाश्वत अतीत से जोड़ने वाली एक शक्तिशाली सांस्कृतिक कथा बनेगी.''
खंडेलवाल ने यह भी उल्लेख किया कि इंद्रप्रस्थ नाम पहले से ही दिल्ली के नागरिक और संस्थागत परिदृश्य में मौजूद है, कई सार्वजनिक संस्थान इस ऐतिहासिक नाम का इस्तेमाल करते हैं, जो निवासियों में इसकी परिचितता और स्वीकृति दर्शाता है. पिछले नाम बदलावों से तुलना करते हुए उन्होंने मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज जैसे शहरों का उदाहरण दिया, जिन्हें स्वदेशी और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाने के लिए नाम बदले गए थे.
सांसद ने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया कि फैसला लेने से पहले इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और अन्य हितधारकों से परामर्श किया जाए. उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार इस प्रस्ताव को एक “महत्वपूर्ण पहल” में बदल सकती है जो भारत की ऐतिहासिक निरंतरता को मजबूत करेगी. यह मांग ऐसे समय में आई है जब केरल सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र ने कल ही राज्य का नाम ‘केरलम’ करने को मंजूरी दी थी. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जो नए प्रधानमंत्री कार्यालय कॉम्प्लेक्स ‘सेवा तीर्थ’ में हुई.