Himalayan Region Earthquake: म्यांमार और तिब्बत के इलाकों में हाल ही में चौथी बार आए भूकंपों ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है. बुधवार को तिब्बत में 3.6 तीव्रता का एक झटका महसूस किया गया, जिसका केंद्र जमीन से 50 किलोमीटर नीचे था. वहीं म्यांमार में भी एक के बाद एक कई हल्के से मध्यम स्तर के झटके आए, जिनमें 4.4 तीव्रता वाला सबसे प्रमुख था. इससे पहले फरवरी की शुरुआत में मगवे क्षेत्र में 6.0 तीव्रता का एक मजबूत भूकंप आया था, आफ्टरशॉक्स अब तक जारी हैं.
इन झटकों का मुख्य कारण क्या है?
यह पूरा क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता का केंद्र है. भारतीय प्लेट लगातार उत्तर दिशा में खिसक रही है और यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है. इस टकराव से भारी मात्रा में तनाव जमा होता है. जब यह तनाव अचानक रिलीज होता है, तो भूकंप आते हैं. इसी प्रक्रिया से हिमालय पर्वत श्रृंखला बनी और आज भी बढ़ रही है. म्यांमार का इलाका इंडो-बर्मीज आर्क से जुड़ा है, जहां प्लेटों की साइड-वेज मूवमेंट (स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट) भी भूकंप पैदा करती है.
भारत में सबसे ज्यादा खतरा कहां?
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, यह क्षेत्र सिस्मिक ज़ोन V (सबसे उच्च जोखिम) में आता है. पूर्वोत्तर राज्य जैसे असम, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, ये हिमालयी और इंडो-बर्मीज फॉल्ट लाइन्स के करीब हैं. इसके साथ-साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाके भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि हिमालयी बेल्ट से निकटता है. वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि जमा हो रही सिस्मिक ऊर्जा से भविष्य में बड़ा (मेगाथ्रस्ट) भूकंप का खतरा बना रहता है.
क्या तैयारी चल रही है?
भारत का नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय 24x7 मॉनिटरिंग कर रहा है. भूकंप ऐप (BhooKamp App) के जरिए रियल-टाइम अलर्ट मिलते हैं. आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं, खासकर सीमावर्ती इलाकों में. स्थानीय स्तर पर इमारतों की मजबूती, इमरजेंसी प्लान और जागरूकता अभियान चल रहे हैं. ये झटके याद दिलाते हैं कि प्रकृति की यह प्रक्रिया जारी है, इसलिए भूकंप-प्रतिरोधी निर्माण और तैयारियां बहुत जरूरी हैं. अगर आपके इलाके में कोई प्रभाव पड़ा हो, तो NCS की वेबसाइट या ऐप चेक करते रहें.