नई दिल्ली: मेघालय में भारत में सबसे अधिक एचआईवी के मामले हैं और राज्य में वर्तमान में 10,000 से अधिक मरीज एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) पर हैं. यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री डब्ल्यू श्यल्ला ने बुधवार को विधानसभा में दी. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए 25 करोड़ रुपए की पांच साल की हस्तक्षेप योजना को पहले ही मंजूरी दे दी है.
मंत्री ने कहा कि फिलहाल राज्य में 10,293 लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं और वे एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी प्राप्त कर रहे हैं. एनपीपी विधायक मेहताब चांदी ए संगमा के सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में चिंताजनक रूप से बढ़ते एचआईवी/एड्स मामलों से निपटने के लिए मिशन-मोड प्रोग्राम के लिए 25 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं.
मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में इस बीमारी से जुड़ी मौतों की संख्या 749 रही है, जिसमें ईस्ट खासी हिल्स में सबसे ज्यादा 435 मौतें हुईं, उसके बाद वेस्ट जयंतिया हिल्स (123) और ईस्ट जयंतिया हिल्स (90) हैं. अन्य जिलों में मौतों की संख्या कम रही. श्यल्ला ने कहा कि यह ध्यान देने योग्य है कि सभी दर्ज मौतें अवसरवादी संक्रमण (Opportunistic infections) के कारण हुईं और कोई भी मौत सीधे एचआईवी/एड्स के कारण नहीं बताई गई.
बढ़ते संक्रमण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि एचआईवी और एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम के तहत गोपनीयता के प्रावधान और सामाजिक कलंक प्रमुख चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा कि एचआईवी की स्थिति को गोपनीय रखना जरूरी है, बिना सहमति के टेस्ट नहीं किए जा सकते, और हम लोगों को दवा लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. सबसे बड़ी बात यह है कि कलंक की वजह से लोग जांच के लिए आगे आने से डरते हैं.
इन बाधाओं के बावजूद विभाग जागरूकता अभियानों को तेज कर रहा है ताकि इलाज लेने वालों की संख्या बढ़े. श्यल्ला ने मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा और राज्य कैबिनेट को श्रेय देते हुए कहा कि पांच साल के मिशन को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत टेस्टिंग सेंटर बढ़ाए जाएंगे और मानव संसाधन को मजबूत किया जाएगा. विधायकों के सवालों के जवाब में मंत्री ने बताया कि सरकार समुदाय के हितधारकों के साथ मिलकर टेस्टिंग और इलाज को प्रोत्साहित कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों ने मिलकर एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए एक बोलेरो वाहन दान किया है.
उन्होंने कहा कि मैं यह बताना चाहता हूं कि एचआईवी अब मौत का फैसला नहीं है. यह ठीक नहीं हो सकता, लेकिन इसका इलाज संभव है ताकि मरीज बहुत सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी सकें. इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में श्यल्ला ने बताया कि मेघालय में वर्तमान में जिलों में 392 स्टैंडअलोन इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (ICTC) हैं, साथ ही पूरे राज्य में चार मोबाइल ICTC तैनात हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने मेघालय एड्स कंट्रोल सोसाइटी को वर्ष 2025-26 के लिए 17.8 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं, ताकि जागरूकता कार्यक्रम, लक्षित आउटरीच, ओपियोइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी सेंटर, विस्तारित स्क्रीनिंग और देखभाल सहायता सेवाओं को मजबूत किया जा सके.