नई दिल्ली: आम धारणा है कि ब्रेस्ट कैंसर केवल महिलाओं की समस्या है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है. पुरुषों में भी यह कैंसर हो सकता है, हालांकि मामले बहुत कम होते हैं. अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, 2025-2026 में अमेरिका में लगभग 2,670-2,800 पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का निदान होने की संभावना है, जबकि इससे जुड़ी मौतें करीब 510-530 हो सकती हैं.
भारत और विश्व स्तर पर भी यह दुर्लभ लेकिन संभव है. पुरुष अक्सर लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं या शर्मिंदगी महसूस करते हैं, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है और इलाज जटिल हो जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान से यह कैंसर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर कैसे विकसित होता है?
पुरुषों के शरीर में भी जन्म से थोड़ी मात्रा में ब्रेस्ट टिश्यू (स्तन ऊतक) होता है. इन कोशिकाओं में असामान्य बदलाव होने पर कैंसर शुरू हो सकता है. ज्यादातर मामलों में यह छाती के केंद्र में, निप्पल के नीचे या आसपास एक दर्दरहित गांठ के रूप में शुरू होता है. शुरुआत में दर्द न होने से कई लोग इसे गंभीर नहीं मानते, लेकिन समय पर जांच न कराने से यह फैल सकता है.
ब्रेस्ट को कैंसर हो सकता है कैसे पहचानें?
मुख्य रूप से 60-70 वर्ष की उम्र के पुरुषों में देखा जाता है. हालांकि, किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन युवाओं में बहुत दुर्लभ. पुरुषों में लक्षण अक्सर हल्के शुरू होते हैं. छाती में दर्दरहित गांठ, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना, निप्पल या छाती की त्वचा में रंग बदलाव, लालिमा, झुर्रियां), स्केलिंग या नारंगी छील जैसी बनावट, निप्पल से स्राव, छाती या निप्पल में दर्द, बगल में सूजे लिम्फ नोड्स. यदि ये लक्षण 2-3 सप्ताह से ज्यादा बने रहें, तो तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट या जनरल सर्जन से जांच कराएं. मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड या बायोप्सी से पुष्टि होती है.