ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया सहित इन देशों में Corona से भी खतरनाक वायरस का आतंक, भारत भी अछूता नहीं!

Amanat Ansari 10 Feb 2026 04:36: PM 2 Mins
ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया सहित इन देशों में Corona से भी खतरनाक वायरस का आतंक, भारत भी अछूता नहीं!

Nipah virus threat: निपाह वायरस भारत में फिर से सुर्खियों में है, और लोग इसे कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक मान रहे हैं. इसकी मृत्यु दर (फैटलिटी रेट) लगभग 75% तक बताई जाती है, और अभी तक इसका कोई वैक्सीन या स्पेसिफिक इलाज उपलब्ध नहीं है. लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में एक बड़ी राहत की बात कही है.

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भारत में आए इन मामलों के आधार पर वायरस के दूसरे देशों में फैलने का खतरा बहुत कम है. WHO ने साफ कहा है कि फिलहाल किसी देश को भारत के लिए ट्रैवल बैन या प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है. WHO ने रॉयटर्स को दिए ईमेल में बताया कि मौजूदा मामलों से ज्यादा बड़े पैमाने पर इंसान-से-इंसान फैलाव के कोई मजबूत सबूत नहीं मिले हैं. भारत के पास ऐसे संक्रमणों को काबू करने की अच्छी क्षमता है, और भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.

हाल की स्थिति क्या है?

जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल के बारासत (उत्तर 24 परगना जिले) के एक प्राइवेट अस्पताल में दो हेल्थकेयर वर्कर्स (दोनों 25 साल की नर्सें, एक महिला और एक पुरुष) में निपाह वायरस की पुष्टि हुई. लक्षण दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए थे, और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (पुणे) ने 13 जनवरी को कन्फर्म किया. एक मरीज की हालत गंभीर रही (वेंटिलेटर पर), लेकिन बाद में सुधार हुआ, जबकि दूसरा बेहतर हो रहा है.

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कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में 196 लोगों की जांच हुई, सभी नेगेटिव आए. भारतीय अधिकारियों ने 27 जनवरी तक कोई अतिरिक्त केस नहीं मिलने की पुष्टि की. कुछ रिपोर्ट्स में 5 मामलों का जिक्र था (जिसमें डॉक्टर और अन्य स्टाफ शामिल), लेकिन आधिकारिक WHO और NCDC अपडेट्स में कुल 2 कन्फर्म केस ही हैं, और आउटब्रेक कंट्रोल में लगता है. ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, वियतनाम आदि ने सावधानी के तौर पर एयरपोर्ट स्क्रीनिंग बढ़ा दी है, लेकिन WHO ने कोई ग्लोबल अलर्ट नहीं जारी किया.

निपाह वायरस कैसे फैलता है?

  • यह एक जूनोटिक बीमारी है, यानी मुख्य रूप से जानवरों से इंसानों में आती है. मुख्य स्रोत: फ्रूट बैट्स (चमगादड़, खासकर Pteropus प्रजाति).
  • संक्रमित चमगादड़ फलों पर लार, यूरिन या मल छोड़ देते हैं- इंसान दूषित फल खा लेते हैं.
  • कच्चा डेट पाम सैप (ताड़ी) पीने से भी खतरा.
  • संक्रमित व्यक्ति के बॉडी फ्लूइड्स (जैसे सलाइवा, यूरिन) से करीबी संपर्क में आने पर इंसान-से-इंसान फैल सकता है, लेकिन भारत में अभी ऐसा तेज फैलाव नहीं देखा गया.

लक्षण क्या दिखते हैं?

  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • सांस लेने में दिक्कत
  • खांसी, गले में खराश
  • उल्टी-दस्त
  • मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी
  • गंभीर मामलों में एन्सेफलाइटिस (दिमाग की सूजन), कोमा तक

बचाव के लिए डॉक्टर क्या कह रहे हैं?

संक्रामक रोग विशेषज्ञों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, पेड़ से गिरे फल न खाएं. फल अच्छे से धोकर ही खाएं. कच्चा ताड़ी या डेट पाम सैप बिल्कुल न पिएं. ग्रामीण/जंगली इलाकों में चमगादड़ों के संपर्क से बचें. हाथ धोना, मास्क और साफ-सफाई पर ध्यान दें. थोड़ी सावधानी से इस खतरनाक वायरस से बचा जा सकता है. अभी स्थिति कंट्रोल में है, घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन जागरूक रहें! 

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