पटना: मां का दूध शिशु के लिए अमृत माना जाता है, लेकिन बिहार से आई एक नई रिसर्च ने सभी को हैरान कर दिया है. प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल ‘नेचर’ के सब-जर्नल में प्रकाशित ताजा स्टडी में दावा किया गया है कि बिहार की स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम (U-238) की मौजूदगी पाई गई है.
पटना के महावीर कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र के शोधकर्ता डॉ. अरुण कुमार की अगुवाई वाली टीम ने बिहार के अलग-अलग जिलों से 40 स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध के सैंपल लिए थे. चौंकाने वाली बात यह कि सभी 40 नमूनों में यूरेनियम मिला. सबसे ज्यादा मात्रा कटिहार जिले की महिलाओं के दूध में पाई गई.
स्टडी में लिखा गया है कि मां के दूध के जरिए शिशुओं को होने वाला यूरेनियम का संपर्क “खतरनाक स्तर” तक पहुंच सकता है और शिशुओं में किडनी संबंधी गैर-कैंसरजन्य जोखिम बढ़ सकता है. हालांकि स्टडी प्रकाशित होने के बाद शोधकर्ताओं ने तुरंत सफाई दी है. स्टडी के सह-लेखक और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार घोष ने कहा, ''यूरेनियम की मात्रा 0.7 से 5 पीपीबी के बीच मिली है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (AERB की सुरक्षित सीमा से काफी कम है. 70% से ज्यादा शिशुओं में कोई गंभीर जोखिम नहीं है. माताओं को बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए और स्तनपान जारी रखना चाहिए.''
भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के पूर्व निदेशक और NDMA सदस्य डॉ. दिनेश असवाल ने भी इसे सुरक्षित बताया. उन्होंने कहा, ''यह स्तर चिंता की बात नहीं है. मीडिया में इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं करना चाहिए.'' विशेषज्ञों के मुताबिक बिहार के कुछ इलाकों (खासकर कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर) में भूजल में प्राकृतिक रूप से यूरेनियम की मात्रा ज्यादा रहती है, जो खाने-पीने के रास्ते मां के शरीर में पहुंचता है और फिर दूध में चला जाता है.
फिलहाल यह स्टडी भले ही सुर्खियां बटोर रही हो, लेकिन शोधकर्ता और सरकारी विशेषज्ञ एक स्वर में कह रहे हैं, ''मां का दूध आज भी शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और बेहतरीन आहार है.'' बिहार सरकार ने कहा है कि प्रभावित इलाकों में भूजल की लगातार जांच की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या को और कम किया जा सके.