नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में हाल ही में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome - GBS) के मामलों ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है. यह कोई नया वायरस नहीं है, बल्कि एक दुर्लभ ऑटोइम्यून विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही परिधीय नसों पर हमला कर देती है. इससे मांसपेशियां तेजी से कमजोर हो जाती हैं और गंभीर मामलों में लकवा (पैरालिसिस) तक हो सकता है.
नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में जनवरी 2026 से यह समस्या तेजी से सामने आई है. यहां दो बच्चों की मौत हुई है (एक 6 साल का और एक 15 साल का), जबकि कुल 18 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं (कुछ पुष्टि हुए, कुछ संदिग्ध). स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत हाई अलर्ट जारी किया है.
नीमच शहर में भी एक मामला सामने आया है. पड़ोसी मंदसौर जिले में भी कुछ संदिग्ध या पुष्ट मामले रिपोर्ट हुए हैं, हालांकि ये संख्या अभी कम है. पिछले साल (2025) भी मंदसौर में कुछ GBS के मामले आए थे, जिनमें दूषित पानी को एक वजह माना गया था.
GBS के मुख्य लक्षण क्या हैं?
क्या कारण हो सकते हैं?
बचाव और सावधानियां कैसे बरतें?
यह जानकारी सिर्फ जागरूकता के लिए है. GBS एक गंभीर स्थिति है, इसलिए कोई भी लक्षण दिखे तो खुद से दवा न लें. तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें. राज्य सरकार इलाज का खर्च उठा रही है और स्थिति पर नजर रख रही है.
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!