नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को फैसला किया कि वे तब तक सदन में नहीं जाएंगे, जब तक विपक्षी सांसदों द्वारा उनके हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) पर चर्चा और फैसला नहीं हो जाता. यह जानकारी सूत्रों ने मीडिया को यह जानकारी दी है. हालांकि नियमों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन उन्होंने खुद सदन में न जाने का फैसला किया है.
अगर सरकार या विपक्ष की ओर से उन्हें मनाने की कोशिश भी की जाए, तो भी वे सदन में नहीं जाएंगे. संभावना है कि स्पीकर को हटाने वाला प्रस्ताव बजट सत्र के दूसरे हिस्से के पहले दिन यानी 9 मार्च को ही चर्चा के लिए लिया जा सकता है. इसके लिए 50 सांसदों को हाथ उठाने होंगे. इसके बाद चेयर (अध्यक्ष) प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दे सकता है. संविधान के अनुच्छेद 96(1) के अनुसार, जब स्पीकर के हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो स्पीकर सदन में मौजूद होने पर भी किसी भी बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकते.
हालांकि, स्पीकर को कार्यवाही में हिस्सा लेने और बोलने का अधिकार है, ताकि वे आरोपों के खिलाफ अपना बचाव कर सकें. ऐसी कार्यवाही के दौरान स्पीकर लोकसभा के फ्लोर पर मौजूद रह सकते हैं, लेकिन कुर्सी (चेयर) छोड़नी होगी. विपक्षी नेताओं ने स्पीकर पर निशाना साधा है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में राहुल गांधी को पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवन की अप्रकाशित किताब से अंश पढ़ने की अनुमति नहीं दी थी.
नोटिस में विपक्ष ने कई उदाहरण दिए हैं, जिनमें राहुल गांधी को बोलने से रोकना और आठ सांसदों को निलंबित करना शामिल है. नोटिस में कहा गया कि आठ विपक्षी सांसदों को मनमाने ढंग से निलंबित किया गया; वे महज लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दंडित किए जा रहे हैं.
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने एक्स पर लिखा, ''विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादा पर भरोसा जताया है. माननीय स्पीकर के प्रति व्यक्तिगत सम्मान रखते हुए भी हमें दुख और पीड़ा है कि विपक्षी सांसदों को सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने के अवसर लगातार छीने जा रहे हैं. कई वर्षों बाद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास नोटिस लाया गया है. यह असाधारण परिस्थितियों में उठाया गया असाधारण कदम है."
मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा महासचिव को निर्देश दिया कि वे विपक्षी सांसदों द्वारा उनके हटाने के प्रस्ताव के लिए दी गई नोटिस की जांच करें और आवश्यक कार्रवाई करें. यह नोटिस कई विपक्षी दलों की ओर से कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने लोकसभा सचिवालय को सौंपी थी.