लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने की कितनी संभावना? समझें राजनीतिक समीकरण

Amanat Ansari 10 Feb 2026 02:29: PM 2 Mins
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास होने की कितनी संभावना? समझें राजनीतिक समीकरण

No-confidence motion against Lok Sabha Speaker Om Birla: कांग्रेस ने लोकसभा के महासचिव को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह नोटिस दोपहर 1:14 बजे सदन की कार्यवाही और आचरण नियमों के नियम 94C के तहत सौंपा गया.

इस प्रस्ताव पर लगभग 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह संख्या विपक्ष के व्यापक समर्थन को दर्शाती है और स्पीकर पर कथित पक्षपात, बोलने का समय न देने तथा सत्र के दौरान व्यवधान पैदा करने को लेकर बढ़ती चिंता को प्रतिबिंबित करती है. यह कदम बजट सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जारी टकराव में एक बड़ा उछाल है.

इससे पहले, भाजपा की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में 4 फरवरी 2026 को हुई हंगामे के लिए विपक्षी सांसदों के खिलाफ नियमों के तहत "सबसे सख्त संभव कार्रवाई" की मांग की थी. पत्र में विपक्षी सदस्यों पर सदन के वेल में घुसने, स्पीकर की टेबल पर चढ़ने और कार्यवाही में व्यवधान डालने का आरोप लगाया गया है.

लोकसभा में अब तक क्या-क्या हुआ?

  • विपक्ष (मुख्य रूप से कांग्रेस, सपा, डीएमके आदि) ने 118-119 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नोटिस सौंपा.
  • टीएमसी ने इसमें हस्ताक्षर नहीं किए.
  • स्पीकर पर "खुलेआम पक्षपाती" होने, राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को बोलने न देने, एमपी सस्पेंड करने आदि के आरोप लगाए गए.
  • लोकसभा सचिवालय ने नोटिस प्राप्त कर लिया है, अब नियमों के अनुसार इसकी जांच/प्रक्रिया होगी.
  • भाजपा ने इसे "ड्रामा" करार दिया है.

पास होने की संभावना क्यों बहुत कम है?

  • लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 543 है. स्पीकर को हटाने के लिए साधारण बहुमत (यानी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत) चाहिए, लेकिन व्यावहारिक रूप से एनडीए (एनडीए + सहयोगी) के पास मजबूत बहुमत है (लगभग 290+ सीटें.
  • विपक्ष के पास अभी 220-230 के आसपास सांसद हैं, जो बहुमत से काफी कम है।
  • इतिहास में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अब तक 3 अविश्वास प्रस्ताव आए हैं, लेकिन कभी भी पास नहीं हुआ. सभी गिर गए क्योंकि सत्ता पक्ष का बहुमत मजबूत था.
  • प्रस्ताव को पहले कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन चाहिए ताकि चर्चा हो सके, लेकिन पास होने के लिए सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों का साथ जरूरी होता है, जो इस समय नहीं दिख रहा.

आगे क्या हो सकता है?

सचिवालय जांच करेगा... यदि वैध पाया गया तो सदन में 10 दिनों के अंदर चर्चा और वोटिंग हो सकती है. लेकिन एनडीए के बहुमत के कारण यह खारिज हो जाएगा, जैसे पहले हुआ. यह प्रस्ताव मुख्य रूप से राजनीतिक दबाव बनाने, स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और बजट सत्र में हंगामा जारी रखने के लिए इस्तेमाल हो रहा है.

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