कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी स्टार प्रचारक की रही, तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहे. चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ ने राज्य की 22 विधानसभा सीटों पर सभाएं और रोड शो किए, जिनमें से 19 सीटों पर भाजपा को जीत मिली. इसे भाजपा खेमे में योगी फैक्टर के तौर पर देखा जा रहा है.
भाजपा नेताओं का मानना है कि योगी की आक्रामक हिंदुत्व छवि, कानून-व्यवस्था पर जोर और सीधे संवाद की शैली ने बंगाल के मतदाताओं, खासकर युवा और महिला वोटर्स पर असर डाला. उनकी रैलियों में बड़ी संख्या में भीड़ जुटी, जिससे चुनावी माहौल भाजपा के पक्ष में बनता दिखा. जिन प्रमुख सीटों पर योगी ने प्रचार किया और भाजपा को जीत मिली, उनमें सोनामुखी, नंदाकुमार, कांथी दक्षिण, बाराबनी, तारापीठ, मथाभंगा, धूपगुड़ी, बांकुड़ा, बशीरहाट दक्षिण, कृष्णानगर उत्तर, रानाघाट दक्षिण, आसनसोल दक्षिण, पुरुलिया, बालुरघाट, कूचबिहार दक्षिण, दुर्गापुर पश्चिम, हावड़ा उत्तर, बहरामपुर और खड़गपुर सदर जैसी सीटें शामिल हैं.
इन इलाकों में भाजपा ने या तो अपनी पुरानी पकड़ मजबूत की या फिर विपक्ष से सीटें छीनने में सफलता हासिल की. विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल में भाजपा ने इस बार स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय चेहरों को भी मजबूती से उतारा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की तिकड़ी ने चुनावी अभियान को धार दी. योगी ने अपनी सभाओं में बार-बार कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया. उन्होंने बंगाल में डबल इंजन सरकार का नारा भी दिया, जिसे भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर तक पहुंचाने का काम किया.
विपक्ष इस दावे को भाजपा का राजनीतिक नैरेटिव बता रहा है, लेकिन 22 में 19 सीटों पर जीत का आंकड़ा योगी आदित्यनाथ की चुनावी उपयोगिता को जरूर मजबूत करता है. आने वाले राज्यों के चुनावों में भाजपा योगी को और बड़े स्तर पर प्रचार में उतार सकती है.