लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब विभागों के आवंटन को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर उनसे करीब एक घंटे तक मुलाकात की. इस बैठक को यूपी की राजनीति और 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
हाल ही में कैबिनेट में छह नए चेहरों को शामिल किया गया था और दो राज्य मंत्रियों को कैबिनेट रैंक दिया गया था, लेकिन अब तक किसी को भी विभाग नहीं सौंपे गए हैं. ऐसे में योगी का दिल्ली दौरा खासा महत्वपूर्ण हो गया है.
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अमित शाह के अलावा भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की. सूत्रों के अनुसार, इस दौरान संगठनात्मक बदलावों, प्रदेश स्तर की नई रणनीति और आगामी चुनावी तैयारियों पर विस्तार से बात हुई.
सामाजिक समीकरण साधने पर जोर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार विभागों का बंटवारा सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि चुनावी और सामाजिक रणनीति का हिस्सा होगा. भाजपा नए मंत्रियों के जरिए विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को शामिल कर पश्चिमी UP के जाट मतदाताओं को साधने की कोशिश है.
सपा छोड़कर आए मनोज पांडेय के माध्यम से ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति नजर आ रही है. वहीं कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत जैसे नेताओं को जिम्मेदारी देकर दलित और पिछड़े वर्गों में पार्टी की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
लखनऊ लौटते ही हो सकता है ऐलान
दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं. माना जा रहा है कि राजधानी पहुंचने के बाद नए मंत्रियों को विभाग सौंपने का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है. भाजपा के इस सक्रिय रणनीतिक रुख से साफ है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से पूरे जोर-शोर से कर रही है. हर कदम को सोच-समझकर उठाया जा रहा है.