Operation Sindoor: जब राहुल गांधी ये पूछ रहे थे कि हमारे कितने विमान पाकिस्तान ने गिराए, और बीजेपी कह रही थी कि ऐसा कहकर क्या वो पाकिस्तान का हौसला बढ़ाना चाहते हैं, और चीन को ये बताना चाहते हैं कि उसकाक सारा सामान ठीक है, तब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक नई जानकारी सामने आई, ये पता चला कि इसमें 5 दिग्गज बिजनेसमैन की कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है, जो ड्रोन से लेकर मिसाइल और रडार सिस्टम तक बनाती है, इसमें रतन टाटा और अडाणी की कंपनी के अलावा तीन नाम बेहद चौंकाने वाले हैं.
नंबर 1- TASL कंपनी
मालिक- रतन टाटा का टाटा ग्रुप
हिंदुस्तान के दिग्गज बिजनेसमैन रहे रतन टाटा की ये कंपनी है, जो हवाई और रक्षा क्षेत्र में बहुत समय से काम कर रही है. यह कंपनी रडार, मिसाइल और UAV सिस्टम जैसे कई सामान इंडियन आर्मी को देती है, यानि ये कंपनी बिना पायलट वाले विमान और C-295 जैसा मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी बनाती है, इस कंपनी के सामानों ने पाकिस्तान के होश ठिकाने लगा दिए. इसने आकाश जैसी मिसाइल का रडार सिस्टम भी बनाया है, जिस आकाश ने पाकिस्तान की हवा खराब कर दी.
नंबर 2- पारस डिंफेस कंपनी
मालिक- शरद विर्जी शाह और मुंजल शरद शाह
ये स्वदेशी डिजाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग के लिए जानी जाती है. ये ड्रोन और ऑप्टिक्स के क्षेत्र में शानदार काम कर रही है.
नंबर 3- अल्फा डिजाइन कंपनी
संस्थापक- कर्नल एच शंकर
मालिक- अडाणी ग्रुप
ये रडार से लेकर टैंक के पार्ट्स और सैटेलाइट पेलोड तक कई तरह के सिस्टम बनाती है, और भारत का रडार सिस्टम कैसा है, आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा ही, जब पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन को भारत ने हवा में ही ढेर कर दिया.
नंबर 4- लार्सन एंड टुर्बो
संस्थापक- डेनिश इंजीनियर हेनिंग होल्क लार्सन और सोरेन क्रिस्टियन टुब्रो
मालिक- किसी एक के पास स्वामित्व नहीं है.
ये कंपनी क्लोज इन वेपन सिस्टम और हाई पावर रडार सिस्टम बनाती है, इसे 13 हजार 369 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है.
नंबर 5- अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कंपनी
मालिक- गौतम अडाणी
हर साल 150 मिलियन छोटे कैलिबर के गोला-बारूद बनाना और भारत की 25 फीसदी जरूरत को पूरा करना इसका लक्ष्य है. उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में इसने दो फैक्ट्रियां खोली है, जिसमें मिसाइल भी बनती है. फिलहाल लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल की फैक्ट्री भी खुली है, हालांकि उसका अडाणी की कंपनी से लेना-देना नहीं है.
“आज ब्रह्मोस मिसाइल के लिए दुनियाभर के दर्जनों देश लाइन लगाए खड़े हैं. भारत में सैन्य साजो सामान का न सिर्फ उत्पादन बढ़ा है, बल्कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 24 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है, यानि हमलोग इतने का रक्षा सामान विदेश भेज रहे हैं, जो प्राइवेट कंपनियों के लिए अवसर बढ़ने और मेक इन इंडिया के बाद संभव हो पाया है.”
आज इंडियन नेवी हो या इंडियन आर्मी या फिर एयरफोर्स हर किसी को पूरी तरह से छूट है, उनकी जरूरी डिमांड पूरी की जा रही है, उनके लिए बजट बढ़ाया जा रहा है, क्योंकि देश के जवानों का हौसला तो पहले से बुलंद है, इस हाईटेक जमाने में उन्हें हाईटेक रखा जाना भी जरूरी है, इसलिए सेना के जवानों को सैल्यूट कीजिए, इन कंपनियों का हौसला बढ़ाइए, जो सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी हैं. अगर ये रिपोर्ट पसंद आई तो इसे लोगों तक पहुंचाइए, और अपनी राय भी जरूर दीजिए.