नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने कहा कि अदालत चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप नहीं कर सकती. कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनका उपाय चुनाव बाद चुनाव याचिका दायर करना है.
कोर्ट का फैसला
पीठ ने कहा कि नामांकन रद्द करने का आधार रिटर्निंग अधिकारी का फैसला था, जिसमें मीनाक्षी नटराजन द्वारा फॉर्म 26 के अधूरे एफिडेविट दाखिल करने और एक लंबित शिकायत मामले को छिपाने का आरोप था.
रिटर्निंग अधिकारी ने यह भी दर्ज किया कि नटराजन ने शिकायत मामले में लिखित सबमिशन दिए थे, इसलिए उन्हें मामले की जानकारी थी. मीनाक्षी नटराजन ने चुनाव आयोग के पास भी अपील की थी और 10 जून को चुनाव आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखा था, लेकिन कोई आदेश नहीं आया.
सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलील
मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) का प्रतिबंध इस मामले में लागू नहीं होता, क्योंकि याचिका निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए दायर की गई थी. उन्होंने कहा कि नामांकन रद्द करना स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी था क्योंकि शिकायत मामले में न तो संज्ञान लिया गया था और न ही चार्ज फ्रेम हुए थे.
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग, विजयी उम्मीदवार और अन्य पक्षों ने याचिका का विरोध किया. उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार वैधानिक अधिकार है और नामांकन रद्द होने पर राहत केवल चुनाव याचिका के जरिए ही मिल सकती है. कोर्ट ने पोन्नुस्वामी मामले और बाद के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप पर लगातार रोक लगाई गई है. अदालत ने सिंघवी के "घोर गैर-कानूनी" नामांकन रद्द होने पर हस्तक्षेप की दलील को भी खारिज कर दिया.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नामांकन रद्द होने वाले उम्मीदवारों को सामान्य रूप से चुनाव पूरा होने के बाद ही चुनाव याचिका दायर करनी चाहिए. इस फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन चुनाव याचिका दायर कर सकती हैं.
मीनाक्षी नटराजन का बयान
फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने फॉर्म 26 में कोई जानकारी छिपाई नहीं थी. उन्होंने दावा किया कि फॉर्म 26 में निजी शिकायत (private complaint) का खुलासा करने का कोई कॉलम ही नहीं है. उन्होंने कहा, "जो जानकारी मांगी गई थी, वह मैंने पूरी दी थी. न तो मेरे नामांकन पत्र में कोई कमी थी और न ही कोई छिपाई गई जानकारी." नटराजन ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका सबको पता है. सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करने से उन्होंने इनकार कर दिया.