नई दिल्ली: गाजियाबाद के मुरादनगर इलाके में पुलिस ने एक बड़े नकली दवा रैकेट का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह Himalaya कंपनी की मशहूर लिवर दवा Liv-52 के नाम पर फर्जी टैबलेट्स तैयार कर बाजार में बेच रहा था, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा था. पुलिस और स्वॉट टीम की संयुक्त टीम ने हाल ही में छापेमारी की, जिसमें 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
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इनमें मुख्य आरोपी मयंक अग्रवाल के अलावा अनूप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी शामिल हैं. छापेमारी के दौरान पुलिस ने लगभग 50,000 नकली Liv-52 टैबलेट्स जब्त कीं. इसके अलावा हजारों पैकेजिंग सामग्री भी बरामद हुई. पुलिस को यहां से 500 रैपर शीट्स, 1200 हरे ढक्कन और 1200 सफेद प्लास्टिक डिब्बियां मिलीं. साथ ही एक वैगनआर कार भी जब्त की गई.
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यह गिरोह साधारण सस्ती गोलियां बाहर से बनवाता था और उन्हें असली जैसा दिखाने के लिए नकली ब्रांडेड पैकेजिंग, फर्जी GST नंबर और ड्रग लाइसेंस का इस्तेमाल करता था. एक डिब्बी बनाने में इनका खर्च सिर्फ 35-40 रुपये आता था, लेकिन बाजार में 100 रुपए या इससे ज्यादा में बेचते थे. Himalaya कंपनी की शिकायत पर यह कार्रवाई शुरू हुई. जांच में पता चला कि पिछले कुछ महीनों में ये फर्जी टैबलेट्स अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ, शामली जैसे कई जिलों में सप्लाई की जा चुकी हैं.
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नकली दवाओं के इस्तेमाल से फैटी लिवर या पाचन संबंधी समस्याओं के बजाय लिवर को और ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है. पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में छापेमारी चल रही है. प्रशासन ने ऐसे फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है. यह घटना दवाओं की गुणवत्ता और नकली दवाओं के खतरे की एक बड़ी चेतावनी है.