भारतीय टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल ने ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) से डेविस कप में खेलने के लिए सालाना 50,000 डॉलर (लगभग 45 लाख रुपये) की मांग की है, जिसके कारण टेनिस फैटर्निटी में हलचल मच गई है. नागल का कहना है कि प्रोफेशनल खेलों में खिलाड़ियों को उनके योगदान के लिए भुगतान किया जाना एक सामान्य प्रक्रिया है, चाहे वे अपने देश के लिए खेल रहे हों या किसी अन्य टूर्नामेंट में.
इस मुद्दे पर AITA की कार्यकारी समिति के भीतर मतभेद उभर कर सामने आए हैं. आपको बता दें, इस मामले में कुछ सदस्यों का मानना है कि खिलाड़ियों को अपने देश का प्रतिनिधित्व बिना किसी वित्तीय मुआवजे के करना चाहिए, जबकि अन्य सदस्यों ने प्रदर्शन आधारित बोनस प्रणाली को एक उचित समाधान माना. आखिरकार, AITA ने डेविस कप कप्तान को सुमित नागल से बातचीत करने की अनुमति दे दी.
विवाद के बाद, आखिरकार AITA ने सुमित नागल की मांग को स्वीकार कर लिया. AITA के एक सूत्र के अनुसार, नागल के द्वारा सालाना 45 लाख रुपये की मांग उचित है, क्योंकि इस स्तर के मुकाबलों में खिलाड़ियों को उच्च पुरस्कार राशि मिलती है. उदाहरण के लिए, यूएस ओपन और फ्रेंच ओपन जैसे बड़े टूर्नामेंट के पहले दौर में ही खिलाड़ी बड़ी धनराशि जीतते हैं. लिहाजा, नागल की मांग को बहुत ज्यादा नहीं कहा जा सकता है.
आपको बता दें, स्वीडन के खिलाफ डेविस कप मैच से चोट के कारण बाहर होने के बाद सुमित नागल ने कहा कि यह फैसला डॉक्टर की सलाह पर लिया गया है. उन्होंने कहा, "मेरे लिए खेलना गर्व की बात है, लेकिन चोट के साथ खेलना न केवल मेरे स्वास्थ्य के लिए बल्कि टीम की संभावनाओं के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है."
नागल ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति को साफ करते हुए लिखा, "मैं यह साफ करना चाहता हूं कि किसी भी टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए भुगतान प्राप्त करना पेशेवर खेलों में एक सामान्य प्रक्रिया है. इसमें किसी भी प्रकार का स्वार्थ नहीं है." यह मुद्दा खिलाड़ियों को उनके देश के लिए खेलने के मुआवजे पर एक नई बहस को जन्म दे सकता है.