नई दिल्ली: यह थोड़ा असामान्य लग सकता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना चमकना चाहिए. लेकिन अभी, भले ही भू-राजनीतिक तनाव ऊंचा बना हुआ है, सोना और चांदी की कीमतें गिर रही हैं. रिपोर्ट लिखते समय, MCX गोल्ड 1,34,293 रुपए पर था, जो 10,153 रुपए या 7.03% की गिरावट दर्शाता है, जबकि MCX सिल्वर 2,09,168 रुपए पर था, जो 17,472 रुपए या 7.70% की कमी है.
युद्ध के बावजूद सोना और चांदी क्यों गिर रहे हैं?
सोना और चांदी को आमतौर पर सुरक्षित आश्रय (Safe-haven) संपत्ति माना जाता है. लेकिन इस बार अन्य ताकतें ज्यादा मजबूत साबित हो रही हैं. अक्षा कंबोज, IBJA की वाइस प्रेसिडेंट और Aspect Global Ventures की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन, बताती हैं, ''कीमतें गिर रही हैं क्योंकि अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है, बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं, और उच्च ब्याज दरों की उम्मीदों में बदलाव आ रहा है, जो सोने को- जो कोई ब्याज नहीं देता- कम आकर्षक बनाता है. निवेशक अन्य बाजारों में नुकसान की भरपाई के लिए सोना बेच रहे हैं.''
सरल शब्दों में, जोखिम भले ही ज्यादा हों, लेकिन निवेशक अभी रिटर्न देने वाली संपत्तियों की ओर पैसे ले जा रहे हैं. इसके अलावा, मजबूत रैली के बाद मुनाफा वसूली (profit booking) हो रही है, और कुछ निवेशक इक्विटी में नुकसान को मैनेज करने के लिए सोना बेच रहे हैं. वर्तमान गिरावट भू-राजनीति से कम और वैश्विक वित्तीय स्थितियों से ज्यादा जुड़ी है.
अदित्य अग्रवाल, CFA और Avisa Wealth Creators के CIO, कहते हैं, ''मैक्रो फैक्टर्स अभी सुरक्षित आश्रय की मांग पर हावी हैं. रिस्क-ऑफ लिक्विडिटी क्रंच की वजह से निवेशक बुलियन में मुनाफा बुक कर रहे हैं ताकि इक्विटी के नुकसान को कवर कर सकें.''
वे आगे कहते हैं कि बढ़ती तेल की कीमतें और महंगाई की आशंका अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ज्यादा सख्त नीति की उम्मीद बढ़ा रही हैं, जिससे सोना और चांदी रखने की अवसर लागत (Opportunity cost) बढ़ जाती है. सरल शब्दों में, जब ब्याज देने वाली संपत्तियां ज्यादा आकर्षक लगती हैं, तो सोना और चांदी गिरते हैं. इसके अलावा, मजबूत डॉलर और कड़ी लिक्विडिटी की वजह से कई एसेट क्लास पर दबाव है, जिसमें कीमती धातुएं भी शामिल हैं.
क्या डिप में खरीदना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ब्रेकडाउन नहीं, बल्कि मजबूत रैली के बाद एक सुधार (Correction) है. सेंथिल आर कुमार, Nitstone Finserv के MD और CEO, कहते हैं, ''सोना और चांदी की कीमतों में हालिया नरमी एक स्वस्थ बाजार समायोजन को दर्शाती है. अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूत बदलाव की वजह से कुछ शॉर्ट-टर्म रीबैलेंसिंग हुई है, जबकि भू-राजनीतिक जोखिम का कुछ हिस्सा पहले की रैली में ही मूल्यांकित हो चुका था.''
कंबोज सलाह देती हैं, ''निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए से स्टैगर्ड निवेश रणनीति अपनानी चाहिए. हालांकि, शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतनी होगी क्योंकि कीमतें काफी अस्थिर हैं.'' अग्रवाल जोड़ते हैं, ''निवेशकों को पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए और एसेट एलोकेशन में अनुशासन पर फोकस करना चाहिए. आमतौर पर पोर्टफोलियो का 5-10% हिस्सा कीमती धातुओं में हेज के रूप में रखा जा सकता है.'' सोना और चांदी रखने के मूल कारण नहीं बदले हैं. महंगाई का जोखिम, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता अभी भी मौजूद हैं.