नई दिल्ली: बीजेपी नीत केंद्र सरकार महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों ने मीडिया को बताया कि नया कानून 2011 की जनगणना के आधार पर लागू किया जाएगा. प्रस्तावित ढांचे के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. मूल कानून में यह प्रावधान था कि महिला आरक्षण तभी प्रभावी होगा जब नई जनगणना और परिसीमन अभ्यास पूरा हो जाए.
हालांकि, सूत्रों का दावा है कि सरकार जल्दी से काम करना चाहती है. इसका लक्ष्य मौजूदा बजट सत्र में ही कानून में संशोधन का विधेयक पेश करना है ताकि लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सके. विपक्षी दलों से प्रारंभिक संपर्क भी किया गया है ताकि संवैधानिक संशोधन बिना किसी अड़चन के पारित हो सके. अधिकारियों को उम्मीद है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह विधेयक पहले राज्यसभा में पेश किया जाएगा, संभवतः अगले सप्ताह.
2023 में पारित महिला आरक्षण अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है, लेकिन परिसीमन अभ्यास लंबित होने के कारण यह अभी लागू नहीं हुआ है. अगर सरकार परिसीमन से पहले ही आरक्षण लागू करने का फैसला करती है, तो इसके लिए एक और संवैधानिक संशोधन की जरूरत पड़ेगी.
संसद को अधिनियम की धारा 5 में संशोधन करना होगा, जो वर्तमान में महिला आरक्षण को कानून लागू होने के बाद होने वाली पहली जनगणना के बाद परिसीमन से जोड़ती है. चूंकि यह संवैधानिक संशोधन है, इसलिए अनुच्छेद 368(2) के तहत दोनों सदनों में कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वालों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी जरूरी है.
लोकसभा में बीजेपी के पास 240 और राज्यसभा में 103 सांसद हैं, जो संशोधन पास कराने के लिए किसी भी सदन में पर्याप्त संख्या नहीं है. इसलिए विपक्ष का समर्थन जरूरी होगा. पिछले सप्ताह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से अनुरोध किया था कि महिला आरक्षण अधिनियम के "कार्यान्वयन की रूपरेखा और रोडमैप" पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए.
बीजेपी नीत केंद्र सरकार महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि नया कानून 2011 की जनगणना के आधार पर लागू किया जाएगा. प्रस्तावित ढांचे के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. मूल कानून में यह प्रावधान था कि महिला आरक्षण तभी प्रभावी होगा जब नई जनगणना और परिसीमन अभ्यास पूरा हो जाए.
हालांकि, सूत्रों का दावा है कि सरकार जल्दी से काम करना चाहती है. इसका लक्ष्य मौजूदा बजट सत्र में ही कानून में संशोधन का विधेयक पेश करना है ताकि लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सके. विपक्षी दलों से प्रारंभिक संपर्क भी किया गया है ताकि संवैधानिक संशोधन बिना किसी अड़चन के पारित हो सके. अधिकारियों को उम्मीद है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह विधेयक पहले राज्यसभा में पेश किया जाएगा, संभवतः अगले सप्ताह.
2023 में पारित महिला आरक्षण अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है, लेकिन परिसीमन अभ्यास लंबित होने के कारण यह अभी लागू नहीं हुआ है. अगर सरकार परिसीमन से पहले ही आरक्षण लागू करने का फैसला करती है, तो इसके लिए एक और संवैधानिक संशोधन की जरूरत पड़ेगी.
संसद को अधिनियम की धारा 5 में संशोधन करना होगा, जो वर्तमान में महिला आरक्षण को कानून लागू होने के बाद होने वाली पहली जनगणना के बाद परिसीमन से जोड़ती है. चूंकि यह संवैधानिक संशोधन है, इसलिए अनुच्छेद 368(2) के तहत दोनों सदनों में कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वालों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी जरूरी है.
लोकसभा में बीजेपी के पास 240 और राज्यसभा में 103 सांसद हैं, जो संशोधन पास कराने के लिए किसी भी सदन में पर्याप्त संख्या नहीं है. इसलिए विपक्ष का समर्थन जरूरी होगा. पिछले सप्ताह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से अनुरोध किया था कि महिला आरक्षण अधिनियम के "कार्यान्वयन की रूपरेखा और रोडमैप" पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए.