विशाखापत्तनम: अमेरिकी सैन्य हमले में मारे गए 44 वर्षीय मरीन इंजीनियर पटनाला सुरेश की पत्नी भार्गवी के लिए हर सुबह पति का गुड मॉर्निंग मैसेज शुरूआत होती थी. अब उस खाली मैसेज बॉक्स में सिर्फ सन्नाटा बचा है. सुरेश अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों में शामिल थे. ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में उनकी मौत हो गई. भार्गवी ने बताया कि हमले से ठीक एक रात पहले सुरेश का आखिरी संदेश था, ''गुड नाइट. बच्चों का ख्याल रखना.''
परिवार पर टूटा आफत का पहाड़
भार्गवी ने कि सुरेश रोज परिवार को गुड मॉर्निंग मैसेज भेजते थे. हमले वाले दिन सुबह मैं उनका मैसेज इंतजार करती रही. सोचा कि शायद वे व्यस्त होंगे, क्योंकि उस समय वे आमतौर पर डेक पर नहीं होते. उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा, “हम चार थे, अब तीन रह गए.” उनके दो बेटे (13 और 10 वर्ष) पिता की मौत की खबर सुनकर बिलख रहे हैं. दंपति की 15वीं शादी की सालगिरह इस महीने थी. परिवार रिहूनियन की खुशी मना रहा था, लेकिन सपने चकनाचूर हो गए.
सुरेश कौन थे?
सुरेश समुद्री क्षेत्र में करीब दो दशक से काम कर रहे थे. उन्होंने पिछले 12 साल एक ही कंपनी के साथ काम किया और घटना के समय चीफ इंजीनियर के पद पर थे. वे पांच महीने से समुद्र पर थे और छुट्टी लेकर घर लौटने वाले थे. परिवार के अनुसार, सुरेश ने पहले ही रिलीविंग लेटर ले लिया था और अपना रिप्लेसमेंट आने का इंतजार कर रहे थे. भार्गवी ने बताया कि हमले के समय जहाज के जनरेटर में खराबी आई थी. सुरेश उसे चेक करने गए थे, तभी हमला हो गया. उन्हें बताया गया कि सुरेश को सीधा वार लगा और बचने का कोई मौका नहीं मिला.
परिवार की अपील
परिवार अब सुरेश के शव को भारत लाने और घटना की पूरी जानकारी चाहता है. भार्गवी ने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य पति को घर लाना है. सुरेश मूल रूप से 10 दिन के काम के लिए जहाज पर गए थे, लेकिन उनकी विशेषज्ञता के कारण उन्हें रोका गया. चाइनीज न्यू ईयर और क्षेत्रीय तनाव के कारण उनका प्रवास बढ़ गया.
आंध्र प्रदेश भवन, नई दिल्ली के आयुक्त अर्जा श्रीकांत ने कहा कि परिवार को हर संभव मदद दी जा रही है. उन्होंने भारत के ओमान राजदूत को पत्र लिखकर शव की वापसी और परिवार की सहायता के लिए तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.
भार्गवी ने बताया कि सुरेश बहुत निजी स्वभाव के व्यक्ति थे. वे कभी सोशल मीडिया या प्रचार नहीं चाहते थे.