नई दिल्ली: भारतीय संस्कृति में सोना सिर्फ धन का प्रतीक नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और सुरक्षा का हिस्सा है. लेकिन हाल के वर्षों में इसकी कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि अब भारतीय परिवारों के पास जमा सोने की कुल वैल्यू देश की पूरी जीडीपी से भी ज्यादा हो गई है. हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी 2026 तक भारतीय घरों में रखे सोने की अनुमानित कीमत लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 445 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच चुकी है.
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि यह आंकड़ा भारत की अनुमानित जीडीपी (2025-26 में आईएमएफ के अनुसार करीब 4.125 ट्रिलियन डॉलर) से लगभग 20-25% ज्यादा है. मतलब, घरों में बंद सोना देश की सालाना आर्थिक उत्पादकता से कहीं अधिक मूल्यवान साबित हो रहा है. यह सोना मुख्य रूप से ज्वेलरी, सिक्कों और बार के रूप में रखा जाता है.
विभिन्न अनुमानों में भारतीय परिवारों के पास 25,000 से 35,000 टन तक सोना होने की बात कही गई है, जिसमें मॉर्गन स्टैनली जैसी रिपोर्ट्स 34,600 टन का जिक्र करती हैं. सोने की कीमतों में आई तेजी (2025-26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना) ने इस वैल्यू को इतना बढ़ा दिया है.
शेयर बाजार और बैंक डिपॉजिट से तुलना करें तो भी हैरानी होती है. घरों का सोना अब बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैप (करीब 460 लाख करोड़ रुपए) के बहुत करीब पहुंच गया है. साथ ही, यह बैंक में जमा राशि और शेयर बाजार में निवेश के कुल योग से लगभग 1.75 गुना ज्यादा है. 2019 में जहां यह वैल्यू करीब 109 लाख करोड़ थी, आज यह चार गुना से भी ज्यादा हो चुकी है.
लेकिन यह चमकदार तस्वीर के पीछे कुछ चुनौतियां भी हैं. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इतना बड़ा हिस्सा 'डेड एसेट' के रूप में घरों में पड़ा रहता है, जो अर्थव्यवस्था में घूमकर उत्पादक काम नहीं करता. भारत सोने का बड़ा आयातक है, इसलिए यह खरीदारी घरेलू पूंजी को विदेश भेजने जैसी है. गैर-रियल एस्टेट संपत्ति में से करीब 65% हिस्सा सिर्फ सोने में लॉक है, जो विकास के लिए उपलब्ध नहीं होता.
फिर भी, सोने पर भरोसा भारतीयों की सांस्कृतिक आदत है. वैश्विक अनिश्चितता में सोना एक सुरक्षित निवेश के रूप में चमकता रहता है, और भारतीय परिवारों का यह निजी खजाना दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है. कुल मिलाकर, यह आंकड़ा बताता है कि भारत के घरों में कितना बड़ा 'कुबेर का खजाना' छिपा है, जो न सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर मजबूती देता है, बल्कि पूरे देश की आर्थिक कहानी को भी प्रभावित करता है.