नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान की ISI से जुड़े एक खतरनाक जासूसी रैकेट को तोड़ते हुए कई गिरफ्तारियां की हैं. यह नेटवर्क सेना की गतिविधियों पर नजर रखने और गोपनीय जानकारी सीमा पार भेजने में लगा हुआ था.
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के हरचंदा गांव का रहने वाला नौशाद अली उर्फ लालू फरीदाबाद (हरियाणा) के नचौली इलाके में एक पेट्रोल पंप के पास टायर पंचर की छोटी दुकान चलाता था. यह साधारण दिखने वाला काम उसकी जासूसी गतिविधियों के लिए परफेक्ट कवर था. पुलिस ने 16 मार्च को गुप्त ऑपरेशन में उसे दबोचा, जब वह दुकान पर काम कर रहा था. उसके फोन से संवेदनशील चैट्स, दस्तावेज और पाकिस्तानी हैंडलर 'जोरा सिंह उर्फ सरदार' से संपर्क के सबूत मिले. नौशाद मुख्य आरोपी सुहेल मलिक उर्फ रोमियो का करीबी सहयोगी था.
महिला तस्कर और हथियारों का लिंक
मथुरा से गिरफ्तार मीरा (या मीरा देवी) नाम की महिला नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रही थी. वह हथियारों की तस्करी के साथ-साथ संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों और प्रतिष्ठानों की तस्वीरें इकट्ठा करती थी. उसके पास से बड़ी संख्या में ऐसी तस्वीरें बरामद हुई हैं, जो लॉजिस्टिक सपोर्ट और सूचना के आदान-प्रदान में इस्तेमाल हो रही थीं.
अब तक क्या हुई है कार्रवाई?
यह स्लीपर सेल बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली-NCR तक फैला था. अब तक सुहेल मलिक सहित कुल 22 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल हैं. इन नाबालिगों को पैसे के लालच या ब्रेनवॉश करके शामिल किया गया था. पुलिस ने कई मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए हैं.
परिवार और फंडिंग पर शक
नौशाद के पैतृक गांव में जांच से पता चला कि उसके पिता जलालुद्दीन ने हाल के वर्षों में अचानक महंगे प्लॉट खरीदे हैं. UP पुलिस अब उसके परिवार के बैंक खातों, खासकर कोलकाता में रहने वाले भाई के लेन-देन की गहन जांच कर रही है ताकि टेरर फंडिंग के स्रोतों का पता लगाया जा सके.डीसीपी धवल जायसवाल के नेतृत्व में टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी कर रही है. सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा दर्शाता है, और जांच से और बड़े खुलासे होने की आशंका है.