कानपुर में एक मुख्तार अभी भी ज़िंदा है, जो योगी बाबा को ललकार रहा था. जमानत मिलने के बाद कह रहा था हमने तो कुछ किया ही नहीं, तभी DM और SP बुल़डोजर लेकर पहुंच गए. जिसके बाद पुलिस को देखर बाबा गिड़गिड़ाने लगे. आईए जानते हैं कि मुख्तार बाबा कौन है, इसकी कहानी क्या है? पहले सुनिए फिर आपको बताते हैं जब डीसीपी साहब बुलडोजर लेकर पहुंचे तो क्या हुआ.
दरअसल मुख्तार बाबा कानपुर में बिरयानी की दुकान चलाता था, लेकिन 3 जून 2022 को इसकी बिरयानी दुकान में बिरयानी नहीं बल्कि साजिश पक रही थी. साजिश नुपूर शर्मा के बयान का बदला लेने की थी. साजिश पाकिस्तान की तर्ज पर लोगों के हाथों में पत्थर पकड़ाने की थी.
इसी बीच योगी को आनन-फानन में अपने सिंघम आईपीएस को वहां उतारना पड़ा. आरोपियों के पोस्टर छपे, लेकिन मुख्तार बाबा का नाम लेने से हर आरोपी डर रहा था. पर कहते हैं पुलिस अगर चाह ले तो पाताल से भी आरोपी को ढूंढ लेती है और वही मुख्तार बाबा के साथ हुआ.
मुख्तार ने सोचा था सफेदपोश बनकर बच जाऊंगा, लेकिन इसकी दुकान की ईंट-ईंट से ऐसे सबूत मिले. बिरयानी वाली हांडी में रखे ऐसे खास सामान मिले, जिसने मुख्तार बाबा को कानपुर केस का आरोपी नहीं बल्कि मास्टरमाइंड बना दिया. पुलिस की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि मुख्तार बाबा की बिरयानी वाली दुकान में समाज को बांटने वाली साजिश पकती है.
कानपुर को दहलाने वाले जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष जफर हयात हाशमी को मुख्तार बाबा और बिल्डर हाजी वसी ने लाखों रुपये दिए थे, ताकि उससे हर वो सामान इकट्ठा किया जा सके, जिससे कानपुर की सड़कों से शांति गायब हो और पुलिस के लिए हालात को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाए.
इनकी अगली नजर नई सड़क वाली चंद्रेश्वर हाते पर थी, जहां सैकड़ों की संख्या में हिंदू रहते हैं. माहौल खराब करवाकर मुख्तार बाबा उस बस्ती को खाली करवाना चाहता था. यानी गाजीपुर वाले मुख्तार से भी ये तगड़ा दिमाग लगा रहा था, लेकिन इसका नापाक मंसूबा कामयाब होता, उससे पहले ही वह जेल पहुंच गया.
कुछ लोग कहते हैं कि जैसे गाजीपुर वाला मुख्तार अंसारी मूंछों पर ताव देकर अकड़ दिखाता था, वैसे ही ये मुख्तार बाबा अपनी दाढ़ी सहलाते हुए हर बड़ी साजिश को अंजाम दे देता था. बाबा कहता था कि पुलिस कुछ नहीं कर पाएगी, लेकिन उसका ये भ्रम तब टूटा जब इसकी संपत्ति एक-एक कर सीज होने लगी और 2 मई 2024 के दिन तो इसके घर सीधा बुलडोजर पहुंच गया.
उसके बाद जो हुआ, उसकी कहानी बड़ी दिलचस्प है. पुलिस ने मुनादी करवाकर कहा कि मुख्तार के लोगों ध्यान से सुन लो, उन्नाव के कटरी पीपरखेड़ा परगना हड़हा गांव में 19 करोड़ की जो 4 जमीनें हैं. उसे हमने सीज कर दिया है. पुलिस की नजर मुख्तार के बेटे महमूद उमर के नाम खरीदी गई करोड़ों की जमीन पर भी है.