पश्चिम बंगाल के ज़िला मुर्शिदाबाद में कुछ ऐसा हुआ है जिसके बाद जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए है, बहुत बड़ी प्लानिंग को किसने अंजाम दिया ये खुलासा सुनकर आप हिल जाएंगे! ममता बनर्जी के राज़ में प्रभु राम की पूजा शांति से नहीं हो पाती है! रज़मान पर शांति और रामनवमी पर बवाल किसके इशारे पर हुआ! क्या ये वही लोग थे जो पहली बार बंगाल में रामनवमी की छुट्टी होने से नाराज थे, आपको तीन तस्वीरें दिखाते हैं और सारी कहानी साफ करने की कोशिश करते हैं.
पहली तस्वीर में कुछ लोग आपको एक घर के ऊपर नजर आते हैं, वो वहीं से पत्थर फेंक रहे थे, आखिर ये पत्थर वहां कैसे जमा हुए, क्या रामनवमी से पहले ही इसकी प्लानिंग बनाई गई, दूसरी तस्वीर में आपको धूल की शक्ल में धुआं नजर आएगा, दर्जनों की संख्या में रामभक्त इधर-उधर भागते नजर आएंगे. जबकि तीसरी तस्वीर ऐसी है कि हम आपको दिखा नहीं सकते, पर इतना बता सकते हैं कि प्लानिंग जहांगीरपुरी, हल्द्वानी और कानपुर से भी बड़ी थी. तो सवाल है कि ये किसके कहने पर हुआ. मुर्शिदाबाद की जब आप डेमोग्राफी देखेंगे तो ये इलाका मुस्लिम बाहुल्य है.

इन्हीं 70 फीसदी में से कई लोगों ने रामभक्तों पर पत्थर फेंके हैं, ऐसा दावा बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने किया है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की थ्योरी इससे अलग है, वो कहती हैं कि भीड़ वाले दिन हमारी पुलिस ने सुरक्षा का भरपूर इंतजाम किया था, लेकिन भीड़ में बीजेपी के इशारे पर कुछ शरारती लोग घुसे और उन्होंने हमें बदनाम करने के लिए ऐसा करवा दिया, जबकि बीजेपी की थ्योरी इससे उलट है.
बीजेपी के कई नेता ये सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ममता बनर्जी 2024 चुनाव में हार की डर से ये सब करवा रही हैं, क्या घुसपैठियों को हाथों में जानबूझकर पत्थर पकड़ाया गया, ताकि उनकी शिनाख्त भी न हो पाए और काम भी हो जाए. हर एंगल पर पुलिस को जांच करना होगा, लेकिन असल सवाल तो ये है कि रामनवमी का जुलूस अगर हिंदुस्तान में नहीं निकलेगा तो क्या पाकिस्तान में निकलेगा.
जिस मुर्शिदाबाद के रेजिनगर इलाके में ये घटना हुई, वहां पत्थऱ चलने वालों पर एक्शन लेने की बजाय पुलिस रामभक्तों को तीतर-बीतर करने की कोशिश करती नजर आई, ऐसी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जिन्हें देखकर लोग ममता बनर्जी की तुलना मुलायम सिंह यादव से कर रहे हैं, क्योंकि सालों पहले जो यूपी में हुआ, वही अब बंगाल में हो रहा है.
कहते हैं जैसा नेतृत्व होता है, वैसा ही काम पुलिस करती है, और बंगाल में आए दिन हिंदुओं के साथ वो होता है जिसकी उम्मीद इस हिंदुस्तान में कोई नहीं कर सकता, तस्वीरें सामने आती है, सोशल मीडिया पर सवाल उठते हैं और फिर कुछ दिन बाद ये मामला ठंडा पड़ जाता है. पुलिस आरोपियों पर कड़ा एक्शन लेने की बजाय उन्हें बचाने में जुट जाती है, लेकिन इस केस में केन्द्रीय सुरक्षाबलों की एंट्री हो चुकी है, और डीएम से लेकर एसपी तक सब चुनाव आयोग के आदेश पर काम कर रहे हैं तो इस केस में किसी को बचाए जाने की आशंका नजर नहीं आती, सियासत की खातिर कोई कुछ भी कहे पर कानून अपना काम करेगा, और ये सुनिश्चित होना चाहिए कि बंगाल हो या बिहार, जितनी शांति से जुलूस निकाली जाती है, उतनी ही शांति से शोभायात्रा भी निकाली जाए. ममता बनर्जी खुद ब्राह्मण परिवार में पैदा हुईं, लेकिन राजनीति की खातिर वो ऐसी हो गईं कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लेकर हिंदुओं के त्यौहारों पर कैसी व्यवस्था करनी होती है, वो सब भूल चुकी हूं, ऐसे नेताओं को आप क्या सलाह देना चाहेंगे, कमेंट में जरूर बताएं.