UP Voter List: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला अब विधान परिषद (MLC) चुनाव तक पहुंच गया है. विधानसभा की वोटर लिस्ट में अनियमितताओं की पुष्टि के बाद अब इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में भी गड़बड़ियां सामने आई हैं. निर्वाचन आयोग के निर्देश पर कराई गई जांच में आरोप सही पाए गए हैं. इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. इतना ही नहीं, राज्य की सभी 11 एमएलसी सीटों की मतदाता सूचियों की भी जांच की जा रही है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई अजीब नामों वाली वोटर लिस्ट
यह मामला बुधवार शाम उस समय चर्चा में आया, जब इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज कथित अजीब नाम सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे. सूची में कुछ मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम ऐसे दर्ज थे, जिन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची तैयार करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए.
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने आधी रात के बाद जांच के निर्देश दिए. झांसी के मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी गई. जांच में वायरल शिकायतों में बताई गई गड़बड़ियों की पुष्टि हुई. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए.
'राम ने यादव को मारा' और पिता का नाम 'बीकॉम'
मतदाता सूची में दर्ज कुछ नामों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में 'राम ने यादव को मारा', 'फैज अब्बास ने कहा' और 'टक्कर मारना' जैसे नाम सामने आए. एक अन्य प्रविष्टि में मतदाता के पिता का नाम 'बीकॉम' दर्ज बताया गया है. इन प्रविष्टियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसका सत्यापन करने के दौरान ऐसी गलतियां कैसे रह गईं. हालांकि, इन नामों के पीछे तकनीकी कारण भी सामने आया है.
बताया गया कि 'रामहित यादव' नाम को अंग्रेजी में टाइप करते समय लिखा गया, जिसका सॉफ्टवेयर ने गलत अनुवाद करके 'राम ने यादव को मारा' कर दिया. यानी कुछ मामलों में नामों की गड़बड़ी का कारण डेटा एंट्री या सॉफ्टवेयर का अनुवाद भी हो सकता है.
जांच में गड़बड़ी की पुष्टि, अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
झांसी मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में मतदाता सूची की गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए हैं. यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया का अहम हिस्सा होती है. इसमें नाम, पहचान या अन्य विवरण गलत होने से मतदाताओं को परेशानी हो सकती है और निर्वाचन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं.
अब सभी 11 एमएलसी सीटों की मतदाता सूची की जांच
निर्वाचन आयोग ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश की सभी 11 विधान परिषद सीटों की मतदाता सूचियों की जांच शुरू कराई है. इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. आयोग की इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि गड़बड़ियां केवल इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित हैं या दूसरी मतदाता सूचियों में भी इसी तरह की गलतियां मौजूद हैं.
विधानसभा की वोटर लिस्ट में भी सामने आई थीं गड़बड़ियां
इससे पहले पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भी अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी. निर्वाचन आयोग के निर्देश पर दो एसडीएम समेत तीन लोगों को चुनाव संबंधी कार्यों से हटाया गया और एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए. विधानसभा और एमएलसी मतदाता सूचियों से जुड़े इन मामलों के सामने आने के बाद निर्वाचन प्रक्रिया में डेटा एंट्री, सत्यापन और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
चुनाव आयोग के सामने विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों की पुष्टि के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती गलत प्रविष्टियों को सुधारने और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने की है. आयोग ने जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जबकि सभी 11 एमएलसी सीटों की सूचियों की पड़ताल भी की जा रही है. इस पूरे मामले में अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच के बाद किन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होती है और मतदाता सूची में मिली त्रुटियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.