बिहार में अब GPS से ट्रैक होंगी सरकारी एंबुलेंस! मरीज के सबसे करीब वाली गाड़ी होगी रवाना, प्राइवेट एंबुलेंस का किराया भी होगा तय

Amanat Ansari 22 Oct 2026 09:48 PM 2 Mins
बिहार में अब GPS से ट्रैक होंगी सरकारी एंबुलेंस! मरीज के सबसे करीब वाली गाड़ी होगी रवाना, प्राइवेट एंबुलेंस का किराया भी होगा तय

Bihar Ambulance Tracking System: बिहार में मरीजों को इमरजेंसी के समय एंबुलेंस के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है. राज्य की सभी सरकारी एंबुलेंस में GPS लगाया जाएगा. इससे एंबुलेंस की लोकेशन और उसकी उपलब्धता पर ऑनलाइन नजर रखी जा सकेगी. जरूरत पड़ने पर मरीज के सबसे नजदीक मौजूद एंबुलेंस को तुरंत रवाना करने में मदद मिलेगी. सरकार निजी एंबुलेंस को भी इस व्यवस्था से जोड़ने और उनका किराया निर्धारित करने की तैयारी कर रही है.

24 घंटे कंट्रोल रूम से होगी एंबुलेंस की निगरानी

नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी एंबुलेंस में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी GPS लगाया जाएगा. इसके जरिए एंबुलेंस की वास्तविक लोकेशन और परिचालन की चौबीसों घंटे निगरानी की जा सकेगी. इसके लिए केंद्रीयकृत कंट्रोल रूम की भूमिका अहम होगी. किसी मरीज को दुर्घटना, गंभीर बीमारी या अन्य आपात स्थिति में एंबुलेंस की जरूरत पड़ने पर कंट्रोल रूम उसकी लोकेशन के आसपास मौजूद एंबुलेंस की जानकारी प्राप्त कर सकेगा. इसके बाद उपलब्धता के अनुसार सबसे नजदीकी गाड़ी को मरीज के पास भेजने की व्यवस्था होगी. इससे एंबुलेंस की उपलब्धता पता करने और मरीज तक गाड़ी पहुंचाने में होने वाली देरी कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

निजी एंबुलेंस भी होंगी सिस्टम में शामिल

बिहार सरकार की योजना केवल सरकारी एंबुलेंस तक सीमित नहीं है. स्वास्थ्य विभाग निजी एंबुलेंस को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए निजी एंबुलेंस की मैपिंग की जाएगी, ताकि जरूरत के समय उनकी लोकेशन और उपलब्धता की जानकारी मिल सके. इससे उन इलाकों में भी मरीजों को राहत मिल सकती है, जहां सरकारी एंबुलेंस की उपलब्धता सीमित है या मांग अधिक रहती है.

मनमाना किराया वसूलने पर लगेगी रोक

निजी एंबुलेंस के किराये को लेकर भी सरकार नई व्यवस्था बनाने की तैयारी में है. इसके तहत निजी एंबुलेंस के लिए निर्धारित दरें तय करने की योजना है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों से मनमाना किराया नहीं वसूला जा सके. अक्सर आपातकालीन स्थिति में मरीज के परिजनों को जल्द अस्पताल पहुंचने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे में किराये की स्पष्ट दरें निर्धारित होने से उन्हें आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, निर्धारित दरों और नई व्यवस्था को लागू करने की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है. 

ग्रामीण इलाकों के मरीजों को मिलेगी राहत

बिहार के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी चुनौती है. GPS आधारित निगरानी व्यवस्था से यह पता लगाना आसान हो सकता है कि किस क्षेत्र में कितनी एंबुलेंस उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर किस वाहन को भेजा जा सकता है. इससे सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है.

व्यवस्था लागू होने के बाद बढ़ेगी जवाबदेही

एंबुलेंस की ऑनलाइन निगरानी होने से उनके संचालन पर नजर रखना आसान होगा. इससे वाहनों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल की जानकारी जुटाने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, इस योजना का वास्तविक लाभ GPS व्यवस्था लागू होने, कंट्रोल रूम के प्रभावी संचालन और जरूरत के समय पर्याप्त एंबुलेंस उपलब्ध होने पर निर्भर करेगा. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का उद्देश्य बिहार में आपातकालीन चिकित्सा परिवहन को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है.

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