गोपालगंज (बिहार): बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बेटियों की शिक्षा जारी रखने के लिए समर्पित प्रयासों के लिए गोपालगंज जिले के कुचायकोट स्थित मध्य विद्यालय कन्या की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है. शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया.
क्या है उनकी खासियत?
ग्रामीण इलाकों में आर्थिक तंगी, सामाजिक बाधाएं और प्राकृतिक आपदाओं के बीच छात्राओं को पढ़ाई से जोड़े रखना आसान नहीं है. पुष्पा प्रसाद ने पारंपरिक तरीकों के साथ नवाचार अपनाया. उन्होंने कक्षा में गतिविधियां, कम लागत वाली शिक्षण सामग्री और रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया ताकि पढ़ाई बोझ न बने बल्कि रुचिकर हो.
डिजिटल संसाधनों और क्यूआर कोड आधारित सामग्री के जरिए उन्होंने पढ़ाई को आसान बनाया. भूमिका निभाने वाली गतिविधियों से विषयों को समझने में मदद की. अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा से जोड़ने और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया.
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर फोकस
पुष्पा प्रसाद का काम सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं. वह छात्राओं के स्वास्थ्य, पोषण और मासिक धर्म स्वच्छता पर जागरूकता फैलाती हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई नियमित बनाए रखना उनकी प्राथमिकता रही. एक शिक्षक माता-पिता के बाद दूसरे अभिभावक की तरह बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करता है, यह उनकी सोच है.
उनके इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 उनके समर्पण, नवाचार और बालिका शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है. पुष्पा प्रसाद ने साबित किया कि सही सोच और मेहनत से सरकारी स्कूलों में भी शिक्षा को प्रभावी बनाया जा सकता है. उनकी पहल बाढ़ जैसी चुनौतियों के बीच भी शिक्षा की लौ जलाए रखने का उदाहरण है.