नई दिल्ली: भारतीय सेना एक मेजर को सेवा से बर्खास्त करने की तैयारी में है. उन पर साथी अफसरों की पत्नियों के साथ अवैध संबंध रखने समेत कई गंभीर आरोप हैं. सेना ने इस मामले में कोर्ट-मार्शल के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता चुना है. अगस्त 2023 में मेजर की तत्कालीन पत्नी ने सेना मुख्यालय के अनुशासन एवं सतर्कता निदेशालय में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में व्यभिचार (अडल्ट्री), नशाखोरी और परिवार की अनदेखी के आरोप लगाए गए थे.
दावा किया गया था कि उनके चार महिलाओं से संबंध थे, जिनमें से दो सेना के ही साथी अफसरों की पत्नियां थीं. इसके बाद अक्टूबर 2023 में कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठाई गई. सेना ने 10 अगस्त को आर्मी रूल्स 19 और 14 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया. इसमें पूछा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में कोर्ट-मार्शल व्यावहारिक नहीं है, तो उन्हें सीधे सेवा से बर्खास्त क्यों न कर दिया जाए.
ट्रिब्यूनल में याचिका
मेजर ने इस प्रक्रिया को रुकवाने के लिए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच का दरवाजा खटखटाया, लेकिन ट्रिब्यूनल ने राहत देने से इनकार कर दिया. जस्टिस राजेंद्र मेनन और लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती की बेंच ने मेजर को निर्देश दिया कि वे अपनी आपत्तियां नोटिस के जवाब में दर्ज कराएं. साथ ही सेना को आदेश दिया कि वह मेजर को कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की जांच रिपोर्ट और चार्ज हियरिंग के दस्तावेज सौंपे.
मेजर का पक्ष
मेजर का कहना है कि सेना ने आर्मी रूल 180 का उल्लंघन किया है. आरोपित महिलाओं और उनके पतियों को गवाही के लिए नहीं बुलाया गया. मोबाइल, लैपटॉप आदि जब्त करने और आवास की तलाशी में नियमों की अनदेखी हुई. उन्होंने बताया कि 30 मार्च 2026 को अनंतनाग में आपसी सहमति से तलाक हो चुका है और पूर्व पत्नी ने शिकायत वापस ले ली थी.
पूर्व पत्नी ने लिखित में कहा कि वैवाहिक तनाव के कारण शिकायत की गई थी, जिसका कोई ठोस आधार नहीं था. ट्रिब्यूनल ने कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग खारिज करते हुए मेजर को कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल करने को कहा है. सेना प्रशासनिक बर्खास्तगी की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है.