बुलडोजर एक्शन पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

Global Bharat 13 Sep 2024 08:47: PM 2 Mins
बुलडोजर एक्शन पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए घरों को बुलडोज़र से तोड़े जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है. इलहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस रुख के बाद आया है जिसमें बुलडोज़र से की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे. हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि आखिर किस परिस्थिति में याचिकाकर्ता का घर तोड़ा गया, कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया.

इस मामले में याचिकाकर्ता सुनील कुमार के घर को आजमगढ़ के अपर कलेक्टर ने 22 जुलाई को ध्वस्त करने का आदेश दिया था. याचिकर्ता सुनील कुमार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उन्हें उनकी बात रखने का मौका ही नहीं दिया गया, सीधा उनका उनका घर गिरा दिया गया. इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रकाश पड़िया की सिंगल बेंच ने की और अब यह मामला 18 सितंबर को एक बार फिर से सुना जाएगा. कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े आदेश दिए हैं कि वह 18 सितंबर तक इस मामले में अपना जवाब दाखिल करे.

आपको बता दें, अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के एक याचिकाकर्ता जावेद अली के मामले में बुलडोज़र से घर गिराए जाने पर सख्त टिप्पणी की थी. जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके परिवार के एक सदस्य के खिलाफ दर्ज शिकायत के बाद नगर निगम ने उसके घर को गिराने की धमकी दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम और स्थानीय सरकार को आदेश दिया कि फिलहाल के लिए यथास्थिति बनाए रखी जाए. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हृषिकेश रॉय, सुधांशु धूलिया और एसवीएन भट्टी की बेंच ने गुजरात के एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि किसी व्यक्ति का घर केवल इस वजह से नहीं गिराए जा सकते की उसपर कोई आरोप लगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे देश में कानून का शाशन है, किसी व्यक्ति की गलती की सजा उसके परिवार को नहीं दी जा सकती और न ही उसका घर गिराया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर आपत्ति जताते हुए ये भी कहा की किसी दोषी को सजा देने का काम अदालत का है ना की सरकार का. यह भी कहा कि दोषी होने या न होने का फैसला अदालत करती है, न कि सरकार. देश की सर्वोच्च अदालत ने आगे कहा, अगर इस तरह की कार्रवाई को अनुमति दी जाती है तो यह कानून के शासन पर बुलडोज़र चलाने जैसा होगा. कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

बहरहाल सुप्रीम कोर्ट की इसी टिप्पिणि के बाद अब इलहाबाद हाई कोर्ट ने भी बुलडोज़र एक्शन पर कड़ी आपत्ति जताई है. आगे देखने वाली बात यह होगी कि 18 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई में क्या निर्णय आता है और राज्य सरकार क्या जवाब पेश करती है.

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