पटना: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर पर सियासी घमासान तेज हो गया है. अब भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भी पुलिस पर हमला बोल दिया है. उन्होंने इस एनकाउंटर को सरेंडर के बाद हत्या करार देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है.
अश्विनी चौबे ने कहा कि शाहपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारकर मार दिया. यह घटना लोकतंत्र के लिए शर्मसार करने वाली है. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से भी तुरंत संज्ञान लेने और उच्चस्तरीय जांच का आदेश देने की मांग की है. चौबे ने कहा, "पुलिस की यह घृणित और विद्वेषपूर्ण मानसिकता सरकार की बदनामी कर रही है. युवाओं को अपराधी बनाने के बजाय उन्हें बचाना सरकार का कर्तव्य है."
उन्होंने मुख्यमंत्री से दोषी पुलिस अधिकारियों को 48 घंटे के अंदर जेल भेजने की मांग की. इससे पहले बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर जरूरी था तो पुलिस "हाफ एनकाउंटर" कर देती.
क्या है पूरा मामला?
भरत तिवारी सोशल मीडिया पर पुलिस-प्रशासन को लगातार चुनौती दे रहा था. उसने एसडीएम को जान से मारने की धमकी भी दी थी. पुलिस ने उसे घेरा तो मुठभेड़ हुई, जिसमें वह घायल हो गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
परिवार का आरोप है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था और फेसबुक लाइव में बंदूक फेंकते हुए नजर आया था, फिर भी उसे गोली मार दी गई. भोजपुर एसपी ने मामले में 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. यह घटना NDA सरकार में पुलिस की कार्रवाई पर पहला बड़ा आंतरिक विरोध माना जा रहा है.