तेहरान: अमेरिका-ईरान शांति समझौते के महज कुछ घंटों बाद ही मध्य पूर्व में फिर तनाव बढ़ गया है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है. इसका सीधा कारण इजरायल द्वारा लेबनान में जारी हमले हैं. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मैरीटाइम रेडियो चैनलों पर जारी बयान में साफ चेतावनी दी है कि जब तक समझौते की सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, होर्मुज बंद ही रहेगा.
IRGC ने कहा, "लेबनान से इजरायल की वापसी, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और फारस की खाड़ी से अमेरिकी बलों की वापसी. ये अमेरिका-ईरान समझौते की मुख्य शर्तें हैं. जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा."
क्या है पूरा मामला?
बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें चार महीने से चले युद्ध को रोकने की घोषणा की गई थी. लेकिन समझौते के तुरंत बाद इजरायल ने लेबनान में हमले जारी रखे. गुरुवार रात नबातियेह जिले में इजरायली हमले में 18 लोग मारे गए और 33 घायल हुए. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि दक्षिणी लेबनान में IDF (इजरायली सेना) बनी रहेगी और 10 किलोमीटर अंदर तक सुरक्षा जोन बनाए रखा जाएगा.
US-इजरायल में मतभेद
इस घटनाक्रम से अमेरिका और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ गया है. ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने नेतन्याहू पर दबाव बनाया है कि वे लेबनान में अभियान रोकें, लेकिन इजरायल मानने को तैयार नहीं है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है, जिससे वैश्विक तेल का करीब 20% गुजरता है. इसे बंद करने से भारत समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर फिर दबाव पड़ सकता है. वर्तमान में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और आगे क्या होता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.