नई दिल्ली: तमिलनाडु में थलापति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. शुक्रवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी.
मोहना की बेंच ने याचिका को "बिना सबूतों के, अस्पष्ट और बेमतलब" बताते हुए सीधे खारिज कर दिया. याचिकाकर्ता मदुरै निवासी केके रमेश ने आरोप लगाया था कि विश्वास मत हासिल करने के लिए टीवीके ने AIADMK के विधायकों को तोड़ा.
उन्होंने मांग की थी कि पूरे मामले की CBI से जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए. कोर्ट ने कहा, "यह रिट याचिका बिना किसी ठोस सबूत के, सिर्फ शक और आरोपों पर आधारित है. हमें इसमें दखल देने का कोई आधार नहीं दिखता."
बेंच ने इसे "फिशिंग एक्सपेडिशन" (मछली पकड़ने वाली याचिका) करार दिया और कहा कि राजनीतिक दलबदल अपने आप में भ्रष्टाचार नहीं माना जा सकता, जब तक ठोस सबूत न हों. मई 2026 में टीवीके सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया था.
AIADMK के कुछ विधायकों के समर्थन से सरकार बनी. मद्रास हाईकोर्ट ने भी इसी तरह की याचिका पहले ही खारिज कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विजय सरकार को बड़ी राहत मिली है. विपक्षी दलों के आरोपों पर अब कानूनी लड़ाई थम गई है.