ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने एक बड़ा कदम उठाते हुए देश में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. उनका कहना है कि सोशल मीडिया का बच्चों पर मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. प्रधानमंत्री ने इस फैसले को लागू करने के लिए प्रस्तावित कानून को अगले सप्ताह संसद में पेश करने की बात कही है.
सख्त कानून और जुर्माना:
इस नए प्रस्तावित कानून के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफार्म पर 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे न पहुंचें. यदि इस नियम का उल्लंघन होता है तो कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उस पर जुर्माना लगाया जाएगा. एक बार कानून पारित होने के बाद कंपनियों को एक साल का समय मिलेगा, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि नियमों का पालन किस तरह किया जाएगा.
इस फैसले को लेकर मनोचिकित्सक और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बेहद जरूरी कदम मान रहे हैं. उनका कहना है कि आजकल के बच्चों में सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिनका दीर्घकालिक असर हो सकता है.
सोशल मीडिया का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव:
आजकल के दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है, और इसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं. एक ओर जहां सोशल मीडिया लोगों को एक दूसरे से जुड़ने का मौका देता है, वहीं इसके नकारात्मक पहलू भी हैं.
प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 69% वयस्क और 81% किशोर सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं. 2023 में दुनिया भर में अनुमानित 4.9 बिलियन (490 करोड़) सोशल मीडिया उपयोगकर्ता थे, और औसत व्यक्ति हर दिन सोशल मीडिया पर 145 मिनट बिताता है. हालांकि, हाल के अध्ययनों ने यह स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने से चिंता, अवसाद, अकेलापन और FOMO (Fear of Missing Out) जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, खासकर किशोरों और युवा वयस्कों में. सोशल मीडिया पर दूसरों के पोस्ट देखने और उनके जीवन की तुलना करने से बच्चों में आत्म-सम्मान में कमी और मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
भारत में भी जरूरी हो सकता है ऐसा कदम
ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले के बाद, भारत में भी इस पर चर्चा तेज हो गई है. मनोचिकित्सक और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर इस तरह के प्रतिबंधों को लागू करना जरूरी हो सकता है. सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और बच्चों पर इसके नकारात्मक असर को देखते हुए, ऐसे कदमों की जरूरत महसूस की जा रही है.
ऑस्ट्रेलिया का यह कदम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, और यह सवाल उठाता है कि क्या अन्य देशों को भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसे सख्त कदम उठाने चाहिए. सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बच्चों और किशोरों को बचाने के लिए यह जरूरी हो सकता है कि उनके लिए ऐसे प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लगाए जाएं, ताकि वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से बच सकें.