नई दिल्ली: बंगाल के मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने BJP और चुनाव आयोग (EC) को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर लिस्ट की विशेष जांच को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जोड़ने की साजिश हो रही है. मंगलवार को हकीम ने कहा कि अगर BJP और चुनाव आयोग मिलकर CAA लागू करने की कोशिश करेंगे, तो मैं उनके पैर तोड़ दूंगा.
उन्होंने BJP के CAA कैंपों पर निशाना साधा, जो बंगाल में चल रहे हैं. अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले और ऐसे कैंप लगने वाले हैं. SIR प्रक्रिया पहले बिहार में हुई थी, जहां करीब 66 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. इससे बड़ा विवाद हुआ. विपक्षी पार्टियों ने कहा कि इसका मकसद गरीबों और अल्पसंख्यकों को वोट देने से रोकना है. लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि सिर्फ मरे हुए, डुप्लिकेट वोटर कार्ड वाले या बाहर चले गए लोगों के नाम हटाए गए हैं.
मंगलवार को बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने सभी पार्टियों की बैठक बुलाई थी, ताकि वोटर लिस्ट सुधार के बारे में बताया जा सके. बैठक में पार्टियों के प्रतिनिधि और चुनाव प्रमुख के बीच झड़प हुई. नए फॉर्म और वोटर पहचान की प्रक्रिया पर विवाद हुआ. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की तरफ से फिरहाद हकीम ने जोरदार विरोध जताया. उन्होंने कहा कि असली वोटरों को लिस्ट से हटाने की कोशिश हो रही है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हकीम बोले, "मैंने अपनी पार्टी की ओर से साफ कह दिया कि अगर एक भी असली वोटर का नाम हटा, तो हम SIR का विरोध करेंगे. बंगाल के एक भी सच्चे व्यक्ति का नाम नहीं हटने देंगे." मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरह ही हकीम ने वोटर लिस्ट सुधार को पीछे के दरवाजे से NRC बताया. उन्होंने उत्तर 24 परगना के पानीहाटी में 57 साल के प्रदीप कर की आत्महत्या का जिक्र किया, जिसने SIR को अपनी मौत का कारण बताया.
BJP पर डर फैलाने का आरोप लगाते हुए हकीम ने कहा, "जब तक ममता बनर्जी हैं, BJP के पास बंगाल में NRC लागू करने की ताकत नहीं है." वहीं, बंगाल के CEO मनोज अग्रवाल ने डर दूर करने की कोशिश की. उन्होंने कहा, "एक भी असली वोटर का नाम नहीं हटेगा. लिस्ट 100% निष्पक्ष और पारदर्शी होगी."