नई दिल्ली: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की कानूनी मुश्किलें फिर से बढ़ गई हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब्स मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटों तेजस्वी यादव व तेज प्रताप यादव, बेटियों मीसा भारती व हेमा यादव समेत कुल 46 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आरोप तय कर दिए हैं. कोर्ट ने इस मामले में 52 आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि पांच की मौत हो चुकी है.
इस मामले का आधार यह आरोप है कि 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के एवज में उम्मीदवारों से जमीन हासिल की, जो कथित रूप से उनके परिवार के सदस्यों या करीबियों के नाम पर ट्रांसफर की गई. CBI ने 2022 में इस संबंध में FIR दर्ज की थी और जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की.
कोर्ट ने आरोप तय करते हुए लालू यादव और उनके परिवार पर IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस चलाने का आदेश दिया. इनमें सजा का प्रावधान दो वर्ष से अधिक का है. कानून के मुताबिक, अगर कोई जनप्रतिनिधि को दो साल या इससे ज्यादा की सजा होती है, तो उसकी विधायी सदस्यता समाप्त हो जाती है और सजा पूरी होने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती है.
ऐसे में यदि दोष सिद्ध हुआ तो तेजस्वी यादव (पूर्व उपमुख्यमंत्री), मीसा भारती (लोकसभा सांसद), राबड़ी देवी (विधान परिषद सदस्य) और तेज प्रताप यादव जैसे प्रमुख सदस्य लंबे समय तक राजनीति से बाहर हो सकते हैं. वर्तमान में RJD का नेतृत्व मुख्यतः तेजस्वी यादव के कंधों पर है. सजा की स्थिति में पार्टी की कमान रोहिणी आचार्या, राजश्री यादव या किसी नए नेता के हाथ जा सकती है, जो RJD की राजनीतिक संरचना के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है.
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया सबूतों से एक बड़ी साजिश के संकेत मिलते हैं, जहां सार्वजनिक नौकरियों का दुरुपयोग परिवार के लाभ के लिए किया गया. ट्रायल की औपचारिक शुरुआत अब आगे की तारीखों में होगी. लालू परिवार ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है.