पटना: बिहार बोर्ड 10वीं का रिजल्ट आते ही एक प्रेरणादायक कहानी पूरे राज्य में छा गई है. गरीबी और तंगहाली के बीच भी सपनों को पंख लगाने वाली लड़की है सबरीन परवीन. चेहरा कलां प्रखंड के एक छोटे से गांव की रहने वाली सबरीन ने महज मेहनत और लगन के बल पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में पूरे राज्य में टॉप किया है. उनके पिता मोहम्मद शहजाद आलम बंगाल के रामपुरहाट में पुरानी टायर बेचने का छोटा सा काम करते हैं. आर्थिक हालात कितने भी मुश्किल रहे हों, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी.
सबरीन तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं. बचपन से ही पढ़ाई में उनकी रुचि और लगन कमाल की रही. उनकी मां अंगूरी देवी दिन भर घर के काम संभालने के बाद भी बेटी की पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं. परिवार की माली हालत भले ही साधारण रही हो, लेकिन पढ़ाई के प्रति सबरीन का जुनून कभी कम नहीं हुआ.
रोजाना 10 से 11 घंटे की कड़ी मेहनत का नतीजा आखिरकार सामने आ गया. सबरीन परवीन ने 492 अंक हासिल करके बिहार बोर्ड 10वीं में संयुक्त प्रथम स्थान प्राप्त किया है. उनकी यह सफलता सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन सभी बच्चों के लिए मिसाल है जो सीमित संसाधनों में रहकर भी बड़े-बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए रात-दिन मेहनत करते हैं.
इस बार बिहार बोर्ड 10वीं में लड़कियों का जलवा छाया रहा. सबरीन परवीन के साथ संयुक्त टॉप करने वाली दूसरी छात्रा हैं पुष्पांजलि कुमारी, जो सिमतुल्ला आवासीय विद्यालय की छात्रा हैं. दोनों ने 492 अंक (लगभग 98%) हासिल किए.
दूसरे स्थान पर बेगूसराय की नाहिद सुल्ताना रहीं, जिन्हें 489 अंक मिले. तीसरे स्थान पर बक्सर की अनूपा कुमार और बेगूसराय के ओम कुमार रहे, दोनों को 488 अंक प्राप्त हुए. पहले पांच स्थानों पर कुल 13 छात्र-छात्राएं शामिल हैं, जबकि टॉप-10 में कुल 139 परीक्षार्थी हैं. सबरीन परवीन की यह कहानी साबित करती है कि चाहे शुरुआत कितनी भी मुश्किल हो, सच्ची लगन और निरंतर मेहनत कोई भी मुकाम हासिल करा सकती है.