पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले 15 दिनों के भीतर घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला है कि अब पूरे राज्य में सिर्फ एक ही चर्चा हो रही है, आखिर अभिषेक बनर्जी पर लगातार कार्रवाई क्यों तेज होती जा रही है। कोलकाता से सामने आई नई तस्वीरों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
सबसे पहले उनकी Z प्लस सुरक्षा हटाई गई। इसके बाद उनके करीबी भतीजे से जुड़ी 17 संपत्तियों पर नोटिस जारी होने की खबर सामने आई। फिर बंगाल पुलिस ने उनकी आलीशान कोठी पर दबिश दी और अब CCTV हार्डड्राइव जब्त किए जाने के बाद मामला और गंभीर होता दिखाई दे रहा है।
बताया जा रहा है कि कोलकाता स्थित 188A नंबर वाला मकान कभी सत्ता का सबसे ताकतवर केंद्र माना जाता था। आरोप लगते रहे कि यहीं से पूरे बंगाल की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर प्रभाव डाला जाता था। कहा जाता था कि इस घर के आसपास बिना अनुमति कोई तस्वीर तक नहीं ले सकता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
25 मई की दोपहर अचानक भारी पुलिस बल अभिषेक बनर्जी के शांति निकेतन स्थित घर पहुंचा। करीब चार दर्जन पुलिसकर्मी घर के अंदर मौजूद रहे जबकि बड़ी संख्या में जवान बाहर तैनात किए गए। पुलिस के साथ सादी वर्दी में कुछ अधिकारी भी दिखाई दिए, जिन्हें लेकर CBI और ED जैसी एजेंसियों की चर्चा तेज हो गई। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
जांच के दौरान पुलिस ने घर में लगे लगभग 20 CCTV कैमरों की हार्डड्राइव जब्त कर ली। इसके अलावा कई अहम दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए। सूत्रों के मुताबिक मकान का नक्शा नगर निगम से पास नहीं था और इस संबंध में अतिरिक्त समय मांगा गया है। इसी बीच यह दावा भी सामने आया कि अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कुल 24 संपत्तियों में से 17 पर कानूनी सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को नई सरकार के आक्रामक रुख से जोड़कर देखा जा रहा है। 4 मई को चुनाव परिणाम आए, 9 मई को नई सरकार ने शपथ ली, 21 मई को जहांगीर खान की सीट पर उपचुनाव हुआ और 24 मई को परिणाम आने के अगले ही दिन यह बड़ी कार्रवाई सामने आ गई। इस पूरी टाइमलाइन ने बंगाल की राजनीति को और गर्म कर दिया है।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने सिर्फ घर ही नहीं बल्कि परिवार और संपत्तियों से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने का काम शुरू कर दिया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि ममता बनर्जी अब तक इस पूरे मामले पर खुलकर सामने क्यों नहीं आई हैं। विपक्ष लगातार पूछ रहा है कि आखिर अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया जा रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता बदलने के बाद बंगाल में प्रशासनिक कार्रवाई का स्वरूप भी तेजी से बदला है। जो चेहरे कभी सत्ता और प्रभाव के प्रतीक माने जाते थे, अब उन्हीं पर जांच एजेंसियों और पुलिस की नजर है। आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।