बिहार के मोकामा से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी खुद लाइन लगाकर तलाशी देते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना पटना से करीब 90 किलोमीटर दूर नौरंगा जलालपुर गांव की है।
मामला उस वक्त का है जब पुलिस सरपंच पति मुकेश सिंह पर हुई फायरिंग के मामले में आरोपियों सोनू-मोनू के घर छापेमारी करने पहुंची थी। लेकिन घर के अंदर जाने से पहले पुलिसकर्मियों की ही तलाशी ली गई। वीडियो में बनियान पहने एक व्यक्ति पुलिसवालों की जांच करता नजर आ रहा है और पूछता दिख रहा है कि “कोई बच तो नहीं गया?”
बताया जा रहा है कि तलाशी के दौरान हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार समेत चार पुलिसकर्मी लाइन में खड़े रहे, जबकि पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी करते नजर आए। वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
Vijay Kumar Chaudhary ने कहा कि अगर पुलिस के साथ गलत व्यवहार हुआ है तो कार्रवाई होगी। वहीं विपक्षी दलों ने इसे कानून व्यवस्था की विफलता बताया।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि बिहार पुलिस के माथे पर यह “काला धब्बा” है। वहीं Tejashwi Yadav की पार्टी आरजेडी ने तंज कसते हुए कहा कि लगता है पुलिस का नया मैन्युअल आ गया है, जिसमें पहले पुलिस खुद तलाशी देती है।
जांच में सामने आया कि जिन सोनू-मोनू के यहां पुलिस पहुंची थी, उनका इलाके में दबदबा माना जाता है। दोनों भाई मोकामा के जलालपुर गांव के रहने वाले बताए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जाता है कि दोनों ईंट-भट्ठा कारोबार से जुड़े हैं और कई विवादों में उनका नाम सामने आ चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में इन दोनों भाइयों का इतना दबदबा है कि आम लोग खुलकर इनके खिलाफ बोलने से डरते हैं। यही वजह है कि वीडियो सामने आने के बाद मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा।