पटना: बिहार की साहित्यिक विरासत, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक अस्मिता को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला एलआईबी प्रथम साहित्य महोत्सव 2026 आज पटना के विद्यापति भवन में धूमधाम से संपन्न हुआ. लेट्स इंस्पायर बिहार (LIB) अभियान द्वारा 'द लिटरेरी मिरर' के सहयोग से आयोजित इस एक दिवसीय महोत्सव ने लेखकों, कवियों, विद्वानों, प्रशासकों और युवा साहित्य प्रेमियों को एक मंच पर लाकर बिहार के साहित्यिक भविष्य पर गहन विचार-विमर्श किया.

मुख्य संरक्षक और आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने उद्घाटन संबोधन में बिहार की विकास यात्रा को साहित्य से जोड़ते हुए कहा कि राज्य को अगले दशकों में 15 प्रतिशत की सतत विकास दर हासिल करने के लिए सामाजिक समरसता, उद्यमिता और बौद्धिक जागरण आवश्यक है. उन्होंने बिहार की युवा आबादी (करीब 9 करोड़ 30 वर्ष से कम आयु के) को अवसर के रूप में देखते हुए कहा कि साहित्य समाज को विभाजनों से ऊपर उठाकर सामूहिक संकल्प पैदा कर सकता है. विकास वैभव ने नालंदा-विक्रमशिला की प्राचीन विरासत, विद्यापति, दिनकर, रेणु, नागार्जुन जैसे महान साहित्यकारों का जिक्र करते हुए कहा कि साहित्य अन्याय के प्रतिरोध और बेहतर समाज की कल्पना का सबसे शक्तिशाली माध्यम है.

बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा मंत्री अरुण शंकर प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने महोत्सव को बिहार की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़ा बताया और गुरु-शिष्य परंपरा योजना का जिक्र करते हुए LIB से युवाओं तक इसकी पहुंच बढ़ाने का आग्रह किया.

महोत्सव में प्रमुख सत्रों में राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं लेखक अमित लोढ़ा (आईपीएस) ने "सामाजिक परिवर्तन के उपकरण के रूप में साहित्य: बिहारी परिप्रेक्ष्य" पर विचार रखे. अन्य वक्ताओं में लेखक-राजनेता मृत्युंजय शर्मा, कवि समीर परिमल, राधा शैलेंद्र, अविनाश बंधु और कई अन्य शामिल थे. पैनल चर्चाओं के अलावा पुस्तक विमोचन, काव्य संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बनाया.

LIB अभियान, जो 2021 में विकास वैभव द्वारा शुरू हुआ, अब तीन लाख से अधिक स्वयंसेवकों के साथ बिहार में शिक्षा, समानता और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है. इसका लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत में बिहार को अग्रणी बनाना है, जिसमें 2028 तक प्रत्येक जिले में कम से कम पांच स्टार्ट-अप स्थापित कर रोजगार सृजन शामिल है.

महोत्सव की सफलता पर LIB के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित कुमार ने कहा कि यह आयोजन बिहार के विकास को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक आधार पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. साहित्यिक अध्याय की समन्वयक ज्योति झा ने इसे वार्षिक साहित्यिक आंदोलन बनाने की उम्मीद जताई. यह महोत्सव बिहार की साहित्यिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत साबित हुआ, जहां साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाकर युवा पीढ़ी को प्रेरित किया गया.